मंदिर में भावुक होना कमजोरी नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुभव का प्रतीक

भास्कर न्यूज| जालंधर मां बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में सामूहिक हवन करवाया गया। सर्वप्रथम ब्राह्मणों ने मुख्य यजमानों से विधिवत वैदिक रीति के अनुसार पूजन कराया। इसके बाद सपरिवार हवनयज्ञ में आहुतियां डलवाईं। धाम के प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने कहा कि मंदिर में भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि ईश्वर से गहरे जुड़ाव, सच्ची भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुभव का प्रतीक है, न कि किसी कमजोरी का संकेत। यह तब होता है जब व्यक्ति पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजा करता है। इस स्थिति में आंखों से अनायास आंसू बहना एक दिव्य अनुभव माना जाता है। ये भक्ति का उच्चतम स्तर है, जहां भक्त का हृदय ईश्वर से एक हो जाता है। भारद्वाज ने कहा कि जब मन ईश्वर के चरणों में समर्पित होता है, तो भावनाएं स्वाभाविक रूप से उमड़ आती हैं। यह ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम और एकाग्रता को दर्शाता है। मंदिर या धाम का शांत वातावरण मन के बोझ को हलका करता है। इस अवसर पर पंकज शारदा, श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, राजीव शर्मा, राकेश प्रभाकर, पूनम प्रभाकर, सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे। गुलमोगहर सिटी स्थित मां बगलामुखी धाम में हवन करते हुए श्रद्धालु।

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