बिलासपुर में आज से गणेश उत्सव की धूम:ढोल-ताशों से बप्पा का किया गया वेलकम, विधि-विधान से विराजित होंगे लंबोदर

बिलासपुर में बुधवार से शहर से गणेशोत्सव की धूम रहेगी। मंगलवार को ढोल-ताशों से बप्पा का स्वागत कर युवाओं ने पंडाल तक मूर्ति ले गए। इसके चलते बाजार में उत्साह के साथ लोगों की खासी भीड़ नजर आई। चतुर्थी पर्व पर शुभ मुहूर्त में विघ्नहर्ता की प्रतिमा विराजित कर विशेष पूजा आराधना की जाएगी। वहीं, हरितालिका तीज पर्व पर सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की कामना कर 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा। इस दौरान महिलाएं पूरी रात शिव-पार्वती की पूजा-आराधना और भजन-कीर्तन करती रहीं।हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पर्व पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। जिसके बाद शाम होते ही महिलाएं सोलह श्रृंगार के साथ सजी-धजी नजर आई। वहीं, घरों और मंदिरों में शिव-पार्वती की पूजा करने के लिए फुलेरा सजाने की तैयारी में जुट गई। इस दौरान पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधान के साथ पूजा-आराधना कर अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना कीं। महिलाएं रतजगा कर भजन-कीर्तन करती रहीं। बुधवार की सुबह व्रत की पारणा कर प्रसाद ग्रहण कीं। आजादी के पहले गणेशोत्सव मनाने की परंपरा बिलासपुर में महाराष्ट्रीयन समाज के लोगों ने गणेशोत्सव मनाने की परंपरा आजादी के पहले शुरू की थी। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के समय यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोगों से मिलने के बहाने गणेश प्रतिमा की स्थापना शुरू की थी। इस बहाने लोग एक साथ मिलते थे और पूजा के बहाने अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे। इस परंपरा की शुरुआत तिलकनगर चांटापारा से हुई, जिसके बाद धीरे-धीरे कर शहर के चौक-चौराहों में गणेशोत्सव मनाए जाने लगा। जूना बिलासपुर में गणेशोत्सव के 50 साल पूरे जूना बिलासपुर की समिति को 50 साल पूरे हुए हैं। ऐसे में बप्पा का भव्य स्वागत की तैयारी समिति ने किया है। इसी तरह सोमवार को अष्टभुजी गणेश उत्सव समिति ने भगवान गणेश का स्वागत लाइट शो और आतिशबाजी के साथ किया। समिति का यह 32वां साल है। भगवान मूर्ति समिति द्वारा मेन रोड तोरवा में स्थापित किया जा रहा है। वहीं, सिंधी समाज के पदाधिकारी और समितियों द्वारा भगवान गणेश की मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पर्यावरण बचाने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए एक इको फ्रेंडली वर्कशॉप का आयोजन झूलेलाल नगर में किया गया। जगह-जगह सजे पंडाल, बाजार में आकर्षक प्रतिमाएं मंगलवार को शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रथम पूज्यनीय भगवान लंबोदर के लिए शहर के चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं। जहां गणपति बप्पा विराजित होंगे। मंगलवार को विशाल मूर्तियों को ले जाने के लिए समितियों के सदस्य दिनभर मूर्तिकारों के पास पहुंचते रहे। मूर्तियों के साथ-साथ बप्पा की सजावट की सामग्री जैसे रंग-बिरंगी झालरें, मंडप सजावट, मोदक के डिब्बे और पूजन सामग्री की भी अच्छी बिक्री देखने को मिली। भक्तों में अपने आराध्य के स्वागत को लेकर उत्साह चरम पर है। इस दौरान घरों में स्थापना के लिए बाल प्रतिमाएं आकर्षक और नयनाभिराम स्वरुप में मौजूद हैं। मंगलवार को जगह-जगह लगे बाजारों में रौनक देखने को मिली। 100 रुपए से लेकर 5000 हजार तक की मूर्ति मंगलवार को सुबह से लेकर शाम तक बाजार में भीड़ देखी गई। भक्त अपने-अपने घर के लिए भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदते नजर आए। मार्केट में 1 फीट से लेकर 8 फीट तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 100 रुपए से शुरू होकर 5000 रुपए तक है। वहीं, मूर्तिकारों ने स्पेशल डिमांड पर 5 फीट से लेकर 15 फीट तक मूर्ति बनाई है। इस बार फैशनेबल और ट्रेंडी मूर्तियों की मांग ज्यादा देखी गई, जिसमें इको-फ्रेंडली मूर्तियां भी शामिल रहीं। हालांकि, बढ़ती मांग के बावजूद कई मूर्तिकारों को कम ऑर्डर मिले क्योंकि बड़ी मूर्तियां अधिकतर समितियों द्वारा पहले ही बुक कर ली गई थीं।

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