विशेष संवाददाता| रांची रांची के पशु व्यापारियों का धंधा बंद होने के कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि, बिहार के विभिन्न हाट-बाजार से गाय-भैंस खरीद कर लाने वाले व्यापारियों से रास्ते में अवैध वसूली तेज हो गई है। यह आरोप झारखंड राज्य पशु विक्रेता संघ ने लगाया है। संघ के महासचिव दिलीप यादव ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि झारखंड और बंगाल में सरकार द्वारा चलाई जा रही पशुधन योजना के लिए अधिकतर व्यापारी बिहार से पशु लाते हैं। हरेक सप्ताह तीन से चार खेप पशु को लाया जाता है जो एनएच होकर गुजरता है। इस दौरान हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, रामगढ़ सहित अन्य जिलों में पशुओं को लेकर आने वाले वाहनों को रोककर अवैध वसूली की जा रही है। स्थानीय पुलिस और पशु तस्करों का गैंग जबरन पशु वाहन रोककर कागजात की जांच करता है। कागजात होने के बावजूद प्रति वाहन एक से डेढ़ लाख रुपए की मांग करता है। पैसे नहीं देने पर पशुओं को गौशाला भेज दिया जाता है और गाड़ी को जब्त करके व्यापारी को जेल भेज दिया जाता है। कई बार पशु पकड़ने के बाद तस्कर उसे बाहर भेज देते हैं। पशुओं को बांग्लादेश भेज रहे हैं तस्कर संघ का कहना है कि रात के अंधेरे में थाना की मदद से बड़े-बड़े कंटेनर में लदे पशुओं को बंगाल होते हुए बांग्लादेश भेजा जा रहा है। रोजाना करीब 50 कंटेनर हजारीबाग, गिरिडीह व धनबाद के रास्ते आसनसोल बंगाल के बार्डर से बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं। तस्करी के खेल में यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल के दर्जनों पशु तस्कर सहित कई नेता व स्थानीय दागी छवि के लोग शामिल हैं। संघ ने दुधारू पशुओं को लाने वाले व्यापारियों की रक्षा करने और तस्करों पर लगाम लगाने की अपील की है।


