उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को भ्रष्टाचार दूर करने का टास्क दिया है। इसके तहत यूजीसी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को 17 नवंबर तक विशेष भ्रष्टाचार निवारक अभियान चलाने को कहा है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण उपायों पर एक विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निर्देशों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार व गड़बड़ियों को जड़ से खत्म करना है। इस अभियान के तहत, सभी कुलपतियों और निदेशकों को लंबित शिकायतों, मामलों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को निपटाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इस दौरान की गई सभी गतिविधियों की रिपोर्ट यूजीसी के विश्वविद्यालय गतिविधि निगरानी पोर्टल पर जमा की जाएगी। आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि सतर्कता मामलों को लंबा खींचना गलत है। इससे न्याय नहीं हो पाता और अनुशासनात्मक कार्रवाई का मकसद पूरा नहीं होता। इसलिए आयोग ने यह तय किया है कि जांच, पहले और दूसरे चरण की सलाह और अनुशासनात्मक जांच को समय पर पूरा करना चाहिए, इसके लिए एक तय समय सीमा भी बनाई गई है। विलंब से बाधित होता है न्याय : यूजीसी यूजीसी ने कहा कि सतर्कता से जुड़े मामलों में देरी से न्याय बाधित होता है। इसलिए, जांच, सलाह और अनुशासनात्मक कार्रवाई को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया गया है, ताकि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य पूरा हो सके। 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह भ्रष्टाचार को रोकने के लिए, यूजीसी ने सभी संस्थानों से 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाने के लिए कहा है। पहल सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा व ईमानदारी के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए है। विवि-कॉलेजों को 5 बिंदुओं पर देनी है रिपोर्ट 1. लंबित शिकायतों का निपटारा पुरानी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना। 2. लंबित मामलों का निपटारा सभी लंबित प्रशासनिक और अनुशासनात्मक मामलों को समय पर हल करना। 3. परिसंपत्ति प्रबंधन संस्था की संपत्ति का उचित और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना। 4. क्षमता निर्माण कार्यक्रम कर्मचारियों की दक्षता और ईमानदारी बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना। रांची विवि में 5 बड़े लंबित मामले और शिकायतें… शुल्क लेने के बाद भी चार लाख पास छात्रों को नहीं भेजी गई डिग्रियां। पीएचडी अभ्यर्थियों की थिसिस मूल्यांकन, अवार्ड तक की पीड़ा। शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन निर्धारण व भुगतान से संबंधित मामले। विवि में अग्रिम एडवांस लेने के बाद एडजस्टमेंट नहीं करने का मामला। वेतन के साथ पेंशन लेने का मामला, लेकिन अभी तक कटौती नहीं।


