हल्की या भारी…एक्सरसाइज में संतुलन ही महिलाओं के लिए बेस्ट

भास्कर न्यूज। लुधियाना। महिलाओं के शरीर और हेल्थ के लिहाज से एक्सरसाइज का चुनाव बेहद अहम होता है। डॉक्टर और फिटनेस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि न तो सिर्फ हल्की कसरत महिलाओं के लिए पूरी तरह पर्याप्त होती है और न ही हमेशा भारी एक्सरसाइज सही रहती है। असल में दोनों का संतुलन ही महिलाओं को फिट, एनर्जेटिक और हेल्दी बनाए रखता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां महिलाओं को घर और बाहर दोनों मोर्चों पर एक्टिव रहना पड़ता है, वहां सही तरह की एक्सर​साइज उन्हें न केवल तनाव से राहत देती है, बल्कि हड्डियों, हार्मोन और इम्यूनिटी को भी मजबूत करती है। इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि हल्की या भारी, बल्कि यह कि कब, कैसे और किस मात्रा में एक्सरसाइज करनी चाहिए। आखिरकार महिलाओं के लिए हल्की या भारी एक्सरसाइज में से किसी एक का चुनाव करना जरूरी नहीं है। सही उपाय है दोनों का संतुलन बनाना। यह न केवल शरीर को फिट रखेगा बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी देगा। हल्की एक्सरसाइज महिलाओं को रोजमर्रा की थकान और तनाव से राहत देती है, जबकि भारी एक्सरसाइज उन्हें स्ट्रॉन्ग और एनर्जेटिक बनाती है। इसलिए संतुलन को अपनाएं और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ फिट और खुशहाल रहें। {हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, योग, प्राणायाम या स्ट्रेचिंग शरीर पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। इससे मांसपेशियों को धीरे-धीरे एक्टिव रखा जाता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। खासकर उन महिलाओं के लिए यह बेहद उपयोगी है, जो जॉब पर लगातार बैठकर काम करती हैं या जिनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम होती है। {योग और मेडिटेशन जैसी हल्की एक्सरसाइज मानसिक तनाव और एंग्जायटी को कम करती हैं। महिलाएं अक्सर हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज से गुजरती हैं। ऐसे में हल्की कसरत शरीर और दिमाग को बैलेंस में रखने का आसान उपाय है। {कई रिसर्च बताती हैं कि नियमित हल्की कसरत हार्ट डिजीज, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा कम करती है। यह हड्डियों को भी मजबूत बनाती है, जिससे महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम रहता है। {भारी एक्सरसाइज जैसे जॉगिंग, डांस, कार्डियो या वेट ट्रेनिंग महिलाओं को ज्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करती है। इससे न केवल वजन कंट्रोल होता है बल्कि शरीर में एनर्जी लेवल भी बढ़ता है। {महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ बोन डेंसिटी कम होती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है। वेट ट्रेनिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत करती है। साथ ही मांसपेशियों को टोन करती है, जिससे शरीर फिट और शेप में दिखाई देता है। {जब महिलाएं रनिंग, क्रॉसफिट या जिम में हैवी ट्रेनिंग करती हैं, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। रिसर्च यह भी बताती है कि भारी कसरत करने वाली महिलाओं में डिप्रेशन और नेगेटिविटी कम होती है। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए एक्सरसाइज का चुनाव भी उसके हेल्थ कंडीशन, उम्र और लाइफस्टाइल के हिसाब से होना चाहिए। यदि किसी को हार्ट की समस्या है तो ज्यादा हैवी एक्सरसाइज से बचना चाहिए और योग, वॉक को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं युवतियां, जो फिटनेस या शेप को लेकर सजग रहती हैं, वे कार्डियो और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज को अपनाकर अच्छा रिजल्ट पा सकती हैं। {हफ्ते के कुछ दिन हल्की और कुछ दिन भारी एक्सरसाइज शामिल करना सबसे बेहतर विकल्प है। जैसे सुबह योग और शाम को वॉक, वहीं हफ्ते में दो या तीन दिन जॉगिंग, एरोबिक्स या वेट ट्रेनिंग। इस तरह शरीर को एनर्जी और रिलैक्सेशन दोनों मिलेगा। {सिर्फ कसरत ही हेल्थ को बेहतर नहीं बना सकती। सही डाइट और पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है। एक्सरसाइज के बाद शरीर को आराम देना और प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर भोजन लेना जरूरी है, ताकि मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत बन सकें।

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