छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले सरगुजा जिले के पर्यटन स्थल मैनपाट में करीब 13 हाथियों का दल लंबे समय से इस इलाके में उत्पात मचा रहा है। अब ये दल दो समूहों में बंट चुका है, जिनमें से एक समूह टाइगर प्वाइंट और ब्लॉक मुख्यालय नर्मदापुर के आसपास डेरा डाले हुए है। बीती रात हाथियों ने नर्मदापुर में एक घर को तहस-नहस कर दिया। लगातार हो रहे हमलों से स्थानीय लोग डरे हुए हैं और रातभर जागकर अपनी सुरक्षा कर रहे हैं। मैनपाट में लंबे समय से डेरा जमाए हुए 13 हाथियों का झुंड अब दो हिस्सों में बंटकर इलाके में घूम रहा है। इनमें से 7 हाथियों का दल ब्लॉक मुख्यालय नर्मदापुर और उसके आसपास के इलाकों में डटा हुआ है। बीती रात ये हाथी नर्मदापुर के रिहायशी इलाके में घुस आए और सरना पारा बस्ती में जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान उन्होंने मुन्ना राम माझी का घर तोड़ डाला। लोगों के शोर मचाने पर हाथी वहां से दूर चले गए। हाथियों ने आसपास के खेतों में धान की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। शाम होते ही सुरक्षित स्थानों पर जा रहे ग्रामीण
हाथियों की लगातार आवाजाही के चलते नर्मदापुर, कंडराजा, केसरा और आसपास के गांवों के लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। अब ग्रामीण शाम ढलते ही जल्दी खाना खाकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं, ताकि रात में हाथियों के हमले से खुद को बचा सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की टोली रातभर जागकर हाथियों से अपने घरों और फसलों की रक्षा कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। न तो उन्हें टॉर्च, मशाल जैसी जरूरी चीजें दी गई हैं और न ही सुरक्षा के कोई अन्य संसाधन। गज प्रबंधन के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। विधायक बोले- पीएम आवास से हल होगी समस्या सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि मैनपाट क्षेत्र पहले से ही हाथियों के विचरण क्षेत्र में शामिल है और यहां अक्सर हाथियों की मौजूदगी बनी रहती है। वे आमतौर पर कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराने की कोशिश की जा रही है। हाथी पक्के मकानों को नहीं तोड़ते हैं। इससे ग्रामीण सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने बताया कि वन विभाग को हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का सर्वे कर प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं।


