चास-चंदनकियारी के सर्वे सेटलमेंट का मामला विधानसभा में उठा। चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि 1980 में सर्वे सेटलमेंट हुआ। इसमें काफी गड़बड़ियां थीं। जमीन किसी की और नाम किसी का चढ़ा दिया। नए खतियान में जाति की जगह गढ़मात लिख दिया गया है। किसी की एक एकड़ जमीन है, तो उसकी 80 डिसमिल की खेत रैयती और 20 डिसमिल की मेढ़ को सिकमी कर दिया गया है। इससे रैयतों की 20 फीसदी जमीन कम हो गई है। रैयतों ने निपटारा के लिए धारा 87 का केस किया। हजारों केस लंबित हैं। भाजपा सरकार में तत्कालीन भू राजस्व मंत्री के मौखिक आदेश पर धारा 87 की सुनवाई बंद कर दी गई। इसके कारण हजारों रैयतों की जमीन भूमि माफिया कब्जा कर रहे हैं। गरीब किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इन केसों की त्वरित सुनवाई कर जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए। इस मामले में भू राजस्व मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा कि 2 अतिरिक्त न्यायालय का गठन कर मामलों का जल्द निष्पादन किया जाएगा। वहीं दूसरे मामले में विधायक उमाकांत ने कहा कि ऐसी गड़बड़ी पूरे राज्य में है। जमीन का सर्वे हर 40 साल में होना चाहिए। संयुक्त बिहार में यह सर्वे हुआ था। अब 45 साल बीत गए। झारखंड सरकार दोबारा सर्वे सेटलमेंट करवाए, ताकि रैयत, किसान और गरीबों की जमीन भूमि माफियाओं से बचाई जा सके। इसपर भू राजस्व मंत्री ने कहा कि उनकी बातों पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जाएगा। उमाकांत रजक।


