सदर में इलाज के रजिस्ट्रेशन के लिए स्मार्ट फोन जरूरी, मरीज परेशान

सदर अस्पताल, बोकारो में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के पास स्मार्टफोन नहीं होना परेशानियों का कारण बनता जा रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले बुजुर्गों और बच्चों के परिजनों को ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के लिए भटकते देखा गया। इसका मुख्य कारण उनके पास स्मार्टफोन नहीं है। इस कारण उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया। बालीडीह निवासी 62 वर्षीय परिया देवी अपने घुटना के दर्द का इलाज कराने सदर अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंची। वहां नर्स ने उन्हें ओपीडी में पर्ची कटवाने के लिए भेज दिया। वह अपना रजिस्ट्रेशन कराने ओपीडी काउंटर पर गई, तो उससे मोबाइल नंबर पूछा गया। उसने बताया कि मेरे पास मोबाइल नहीं है, इसके कारण उसकी पर्ची नहीं बन पाई। ऐसे में इधर-उधर दौड़ाने के चक्कर में परेशान होकर बुजुर्ग मरीज बगैर इलाज कराए ही वापस लौट गई। जैनामोड़ निवासी 58 वर्षीय ललित बावरी अपने पेट के इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचे थे। वह ओपीडी काउंटर पर पर्ची कटाने पहुंचे। रजिस्ट्रेशन करने वाले ने उससे मोबाइल नंबर मांगा। लेकिन उसने मोबाइल ही नहीं है। इस पर तीन-चार बार इमरजेंसी और पर्ची काउंटर का चक्कर काटने के बाद ओपीडी का समय ही खत्म हो गया और उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ, जिसके कारण बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। एप से रजिस्ट्रेशन के बाद ही मिल रहा टोकन अब सवाल यह है कि दूर-दराज से आने वाले बगैर मोबाइल वाले मरीजों, दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए सदर अस्पताल में पर्ची काटने की अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि अब यहां के मरीजों के लिए ड्रिफकेस ऐप से रजिस्ट्रेशन कराना ही अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए अब मरीज के पास मोबाइल होना आवश्यक है। लेकिन जिन ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों के पास मोबाइल नहीं है, उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। बिना मोबाइल वालों के लिए जल्द ही अलग काउंटर बनाने की योजना है : उपाधीक्षक – डॉ. एनपी सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, बोकारो। सदर अस्पताल में इलाज के लिए लगी भीड़। मैन्युअल राजिस्ट्रेशन बंद किया, दूसरा विकल्प नहीं रखा सदर अस्पताल बोकारो में गोमिया, नावाडीह, कसमार से आने वाले काफी संख्या में ग्रामीण मरीजों को लौटना पड़ रहा है। प्रत्येक दिन फोन नहीं होने की वजह से ओपीडी रजिस्ट्रेशन नहीं के कारण 10 से 15 मरीजों को लौटना पड़ रहा है। चूंकि यहां पर मैन्युअल रजिस्ट्रेशन करना पूरी तरह से बंद कर दिया गाय है। इसका कोई दूसरा विकल्प भी नहीं रखा गया है। कभी-कभी दूर से आने वाले मरीजों को देखकर अस्पताल के कर्मचारियों को दया आ जाती है, तो वह उस मरीज का रजिस्ट्रेशन अपने ही मोबाइल से करा देते हैं। लेकिन जिनके पास फोन नहीं है, वैसे मरीज को बगैर इलाज के लौटना पड़ रहा है।

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