ट्रम्प टैरिफ का असर: झारखंड के 110 करोड़ रुपए के ऑर्डर अटके

भारतीय उत्पादों पर 50% ट्रम्प टैरिफ का असर झारखंड में दिखने लगा है। अमेरिकन खरीदारों ने झारखंड के 110 करोड़ के ऑर्डर को होल्ड पर रखा है। इनमें कपड़ा उद्योग का 60 करोड़, लाह उद्योग का 20 करोड़ और फायर ब्रिक्स का 30 करोड़ रुपए का ऑर्डर है। वहां से नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि इस हालात को देखते हुए हम दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। अन्य देशों से संपर्क में हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही कोई रास्ता निकलेगा। इधर, ऑर्डर न मिलने से नौकरियों पर भी खतरा मंडराने लगा है। कपड़े के निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका हमसे 50% टैरिफ लेगा तो हम अमेरिकी बाजार में टिक नहीं पाएंगे। क्योंकि बांग्लादेश जैसे देशों से अमेरिका सिर्फ 19% टैरिफ ले रहा है। कपड़े के निर्यातक किशोर एक्सपोर्ट के दीपक अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ को देखते हुए अब केंद्र और राज्य सरकार की बेहतर नीतियां ही कपड़े के उद्योग को प्रोत्साहन दे सकती हैं। नई टेक्सटाइल पॉलिसी को जल्द लागू करने की जरूरत है। वहीं ओरिएंट क्राफ्ट के रवि भूषण ने कहा कि ऑर्डर होल्ड होने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। फायर ब्रिक्स… 30 करोड़ रुपए का ऑर्डर अटक गया फायर ब्रिक्स के निर्यातक विवेक टिबड़ेवाल ने कहा कि इस उद्योग में झारखंड से अ​मेरिका जाने वाला करीब 30 करोड़ रुपए का ऑर्डर रोक दिया गया है। अगर ये ऑर्डर पूरे नहीं किए गए तो करीब 500 लोगों की नौकरी पर खतरा है। वैसे अमेरिका अगर ऑर्डर नहीं देता तो हम दूसरे देश में माल भेजेंगे। लाह… 20 करोड़ का ऑर्डर फंसा, रोजगार पर भी खतरा लाह निर्यातकों ने कहा कि लाह व इससे बने प्रोसेस्ड उत्पाद का ऑर्डर भी फंसा हुआ है। करीब 20 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर अमेरिका ने होल्ड पर रख दिया है। इस उद्योग से करीब 500 लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। निर्यातक ए शर्मा ने कहा कि अमेरिकन बायर्स प्रयास कर रहे हैं कि टैरिफ कम हो जाए। कपड़ा… सालाना 200 करोड़ रुपए का अमेरिका को निर्यात करता है झारखंड, 60 करोड़ के ऑर्डर फंसे एसोसिएशन ऑफ अपैरल मैन्यूफैक्चर ऑफ झारखंड के सचिव राहुल पोद्दार ने कहा कि कपड़ा उद्योग से सालाना 200 करोड़ रुपए का निर्यात अमेरिका में किया जाता है। इस समय अमेरिकन कंपनियों द्वारा दिए गए 60 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर होल्ड पर रख दिया गया है। वहां के बायर्स भी ट्रम्प के इस टैरिफ से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि अगर वर्कऑर्डर कैंसिल हो जाए तो हमें विकल्प तलाशने में समय लगेगा। झारखंड से अमेरिका को सालाना निर्यात 50 करोड़ रु. फायर ब्रिक्स 70 करोड़ रुपए लाह और इससे बने प्रोसेस्ड उत्पाद 1000 करोड़ विभिन्न प्रकार के कपड़े

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