राजस्थान के एक दोस्त के जरिए लॉरेंस बिश्नोई से मिला था, मलेशिया से शूटर की तलाश में अमन साहू से हुआ संपर्क

अजरबैजान से प्रत्यर्पण कर लाए गए गैंगस्टर सुनील कुमार मीणा उर्फ मयंक सिंह से एटीएस ने गुरुवार को 10 घंटे तक पूछताछ की। लेकिन उसने अधिकतर सवालों का इशारों में ही जवाब दिया। पूछताछ में मयंक ने कहा कि राजस्थान के घड़साना स्थित मोहल्ला में रहने वाला एक दोस्त लॉरेंस बिश्नोई का परिचित था। उसी के सहारे वह पहली बार लॉरेंस से मिला था। दोनों में अच्छी बातचीत होने लगी। इसके बाद वह गिरोह से जुड़ गया और उसके लिए काम करने लगा। पुलिस से बचने के लिए अचानक मलेशिया भाग गया। मलेशिया में रहते हुए बिश्नोई गिरोह के लिए शूटर की तलाश में वह गैंगस्टर अमन साहू के संपर्क में आया। अमन ने भी उसे हथियार मुहैया कराने की जिम्मेवारी दे डाली। इसके बाद से वह अमन व लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए एक कड़ी का काम करने लगा। टीम ने मयंक से दोनों गैंग के फाइनेंसियल नेटवर्क की भी जानकारी जुटाई है। एटीएस जल्द ही आर्थिक रूप से नकेल कसने के लिए ठोस कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। लातेहार पुलिस ने भी की पूछताछ लातेहार पुलिस की एक टीम भी धुर्वा स्थित एटीएस मुख्यालय पहुंची आैर मयंक से दो घंटे तक पूछताछ की। पुलिस टीम लातेहार में दर्ज आठ केस की सूची लेकर पहुंची थी, जिसमें मयंक की ​संलिप्तता थी। पुलिस ने मयंक से आठ मामलों में अमन और उसके गुर्गे की भूमिका के बारे में पूछताछ की। यह भी पूछा कि कितनी घटनाओं में उसकी संलिप्तता है। वैसे लोगों के बारे में भी जानकारी ली, जिसने धमकी भरे कॉल-मैसेज के बाद गिरोह को आर्थिक लाभ पहुंचाया। पुलिस के कई सवालों पर उसने चुप्पी साध ली।

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