बाबूलाल मरांडी बोले-जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो को भी मिलना चाहिए यह सम्मान दिशोम गुरु शिबू सोरेन (गुरुजी) को भारत र| देने का प्रस्ताव गुरुवार को झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। मानसून सत्र के अंतिम दिन परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने यह प्रस्ताव रखा। पक्ष-विपक्ष दोनों ने इसे समर्थन दिया। बिरुआ ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में गुरुजी ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने आदिवासियों और गरीबों की लड़ाई लड़ी। इसलिए उन्हें भारत र| दिया जाना चाहिए। देश का सर्वोच्च सम्मान देना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा इस प्रस्ताव के साथ खड़ी है। यह ऐतिहासिक फैसला है। लेकिन मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो का नाम भी इस प्रस्ताव में जुड़ना चाहिए। अनुरोध है कि इनके नाम भी जोड़े जाएं। इस पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड विधानसभा ने दिशोम गुरु को भारत र| देने का प्रस्ताव पारित किया है। लेकिन देखना होगा कि केंद्र क्या करता है। क्योंकि केंद्र सरकार जो कहती है, वह करती नहीं है और जो नहीं बोलती है, वह जरूर करती है। अंतिम दिन भी सदन बाधित, पक्ष और विपक्ष के विधायक वेल में आए गुरुवार को भी सदन में भारी हंगामा हुआ। पहली पाली में भोजनावकाश के पहले सदन सिर्फ एक घंटे चला। इससे प्रश्नकाल नहीं हुआ। दोबारा कार्यवाहीं शुरू होने पर भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने विश्वविद्यालय विधेयक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। उधर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि ये अनपढ़ों नहीं, कुपढ़ों की जमात है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के विरोध में भाजपा विधायक वेल में आ गए। विपक्ष के विरोध को देखकर सत्ता पक्ष के विधायक भी वेल में पहुंच गए। सीएम बोले-लोगों को सरकार के खिलाफ करने के लिए हो रही फंडिंग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि लोगों को सरकार के खिलाफ करने के लिए फंडिंग की जा रही है। रिम्स-टू के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही है। हमारी सरकार को बदनाम करते हैं। हमारे काम में व्यवधान डालते हैं। अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ये कानून का सहारा भी लेते हैं। इन लोगों ने संवैधानिक संस्थाओं को जेब में डाल लिया है। अब कानून को भी जेब में डालना चाहते हैं। हमारे हर काम पर बगुले की तरह नजर रखते हैं। हमसे लोगों का विश्वास कैसे छीनें, इसके लिए योजनाएं बनाते हैं। पीएम लेंगे फैसला, फिर राष्ट्रपति को भेजा जाएगा किसी विधानसभा से भारत र| देने की मांग का प्रस्ताव पारित होने पर यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यह एक अनुशंसा है और इससे राजनीतिक दबाव बनता है। विधानसभा से यह प्रस्ताव पास होने के बाद अब राज्य सरकार इसे केंद्र को भेजेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से यह प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जा सकता है। क्योंकि भारत र| पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री लेते हैं। फिर यह अनुशंसा राष्ट्रपति को भेजी जाती है। लेकिन केंद्र सरकार या राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को मानने के लिए विधिक रूप से बाध्य नहीं हैं।


