झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को जेएसएससी द्वारा आयोजित महिला पर्यवेक्षिका की नियुक्ति में विज्ञापन की शर्तों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने प्रार्थियों का पक्ष सुना आैर अगले आदेश तक नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अदालत ने जेएसएससी से पूछा है कि जब विज्ञापन में स्नातक उत्तीर्ण ही शर्त थी तो किस आधार पर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करने के बाद अभ्यर्थियों को रिजल्ट से बाहर किया गया। अदालत ने जेएसएससी को विस्तृत जवाब देने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है। इससे पहले प्रार्थियों की आेर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि जेएसएससी की आेर से निकाले गए विज्ञापन में स्पष्ट है कि अभ्यर्थी स्नातक महिला होनी चाहिए । इस आधार पर जेएसएससी ने लिखित परीक्षा ली आैर सफल अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी किया गया। लेकिन इसके बाद जेएसएससी ने स्नातक प्रतिष्ठा की डिग्री मांगना शुरू कर दिया। विज्ञापन आैर नियमावली में िसर्फ स्नातक लिखा गया। जेएसएससी ने प्रार्थियों को तीन वर्ष तक उसी विषय में स्नातक भी नहीं माना। – शेष पेज 11 पर आंगनबाड़ी केन्द्रों की मॉनिटरिंग में होगी सुविधा महिला पर्यवेक्षिका को आंगनबाड़ी केन्द्रों की मॉनिटरिंग का काम करना होता है। आंगनबाड़ी केन्द्रों से लाभुकों को जितनी भी सुविधाएं दी जाती है वह लाभुकों तक पहुंच रही है या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग पर्यवेक्षिका ही करती है। हरेक प्रखंड में इनकी नियुक्ति होती है। झारखंड में लंबे समय से पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति नहीं हुई है। इस वजह से केन्द्रों की मॉनिटरिंग भी प्रभावित होती है। नई पर्यवेक्षिका की नियुक्ति होने से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की ढंग से मॉनिटरिंग होगी।


