रांची झारखंड के विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रमोशन समय पर नहीं मिलना नियति बन गई है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के 2018 के रेगुलेशन के आधार पर राज्य में प्रमोशन के नियम बने, लेकिन दो साल बाद भी इन नियमों का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। वजह साफ है- आवेदन देने के लिए जरूरी “परफॉर्मा’ यानी आवेदन फॉर्म अब तक जारी नहीं किया गया है। इसका सीधा असर शिक्षकों के करियर और राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। बताते चलें कि यूजीसी ने वर्ष 2018 में विश्वविद्यालय शिक्षकों के प्रमोशन के लिए एक विस्तृत रेगुलेशन जारी किया था। इसके अनुसार, सभी राज्यों को अपने यहां नियम बनाने थे। लेकिन, झारखंड में यह प्रक्रिया इतनी धीमी चली कि पांच साल बाद, यानी 2023 में जाकर इन नियमों को स्वीकृति मिली। रांची यूनिवर्सिटी ने 13 अप्रैल 2023 को इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया। शिक्षकों में उम्मीद जगी कि अब उनके प्रमोशन का रास्ता साफ होगा, जो सालों से रुका हुआ था। लेकिन, यह खुशी सिर्फ कुछ दिनों की ही थी। नोटिफिकेशन के बाद से अब तक करीब दो साल बीत चुके हैं, लेकिन आवेदन फॉर्म का अता-पता नहीं है। इससे पहले भी यूजीसी रेगुलेशन 2010 को बनने में एक दशक से अधिक समय लग गए थे। शिक्षकों का आरोप है कि इस लापरवाही के लिए सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग जिम्मेदार हैं। राज्य की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी, रांची यूनिवर्सिटी, से भी इस तरह की शिथिलता समझ से परे है। नियम तो बन गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए एक साधारण सा परफॉर्मा बनाने में इतनी देरी क्यों हो रही है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यह दिखाता है कि राज्य में उच्च शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर उदासीनता बरती जा रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर अटका: 2018 में जेपीएससी द्वारा नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को 2022 में ही स्टेज-1 से स्टेज-2 में प्रमोट हो जाना चाहिए था, लेकिन वे आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं। {एसोसिएट प्रोफेसर का इंतजार: जिन शिक्षकों को 2018 के बाद एसोसिएट प्रोफेसर बनना था, वे भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। प्रोफेसर बनने का सपना अधूरा: रीडर से प्रोफेसर बनने के योग्य शिक्षक भी आवेदन फॉर्म के अभाव में पदोन्नति से वंचित हैं। नई दिल्ली | दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पहले स्पॉट राउंड का परिणाम जारी कर दिया है। इस राउंड में 7908 छात्रों को एडमिशन मिला है। पहले स्पॉट राउंड के लिए कुल 29,819 आवेदन आए थे। जिन छात्रों को सीट का आवंटन हुआ है, उन्हें आज प्रवेश शुल्क जमा करना होगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी अपने 79 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स की 71,624 सीटों के लिए काउंसलिंग करवा रही है। 60 कॉलेजों में सबसे ज्यादा बीए प्रोग्राम संचालित किए जाते हैं। जिन छात्रों ने काउंसलिंग के शुरुआती राउंड में भाग नहीं लिया था, वे स्पॉट राउंड में शामिल हो सकते हैं। लेकिन स्पॉट राउंड में सीट मिलने के बाद छात्रों को अनिवार्य रूप से आवंटित कॉलेज में प्रवेश लेना होगा। प्रवेश नहीं लेने पर उनकी सीट अगले राउंड में ट्रांसफर कर दी जाएगी और ऐसे छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर दिए जाएंगे। अब छात्रों को स्पॉट राउंड-2 का इंतजार है। दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन जल्द ही इसका शेड्यूल जारी करेगा। मुख्य राउंड की काउंसलिंग और एडमिशन पहले ही हो चुकी है।


