बिलासपुर: ओएचई करंट से ठेका कर्मी की मौत, रेलवे दबा रहा केस बिलासपुर में रेलवे कोचिंग डिपो में ओएचई तार की चपेट में आकर जान गंवाने वाले ठेकाकर्मी मजदूर के परिजन न्याय की मांग को लेकर शुक्रवार को भी प्रदर्शन करते रहे। प्रशासन का रुख संवेदनहीन रहा। गुरुवार को शाम 4 बजे शव जिला चिकित्सालय पहुंचने के बाद भी पोस्टमार्टम शुक्रवार दोपहर 3 बजे हुआ। कारण बताया गया कि पुलिस ने दस्तावेज नहीं दिए। शुक्रवार को पीएम के बाद परिजन ने शव मांगा तो पुलिस वालों ने देने से इनकार करते हुए कहा कि वे शव को उनके गांव छोड़कर आएंगे। 30 घंटे बीत जाने पर शव नहीं मिलने से परिजन और मुलमुला के ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा। परिजन ने शव ले जाने के लिए जिला अस्पताल में काठी तैयार की थी। जब शव नहीं दिया गया तो वे काठी में मृतक की फोटो लगाकर शवयात्रा निकालकर जिला अस्पताल से डीआरएम कार्यालय पहुंचे। इससे एक दिन पहले से प्रदर्शनकारी मृतक की पत्नी को नौकरी, 1 करोड़ रुपए मुआवजा और बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करने की मांग रेलवे से करते रहे। बता दें कि कोच पर चढ़कर काम कर रहे ठेका मजदूर प्रतापबर्मन ओएचई के करंट लगने से करीब 70% झुलस गया था। उसके इलाज में लापरवाही को लेकर भास्कर में सिलसिलेवार छपी खबरोंपर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया। मामले में रेलवे प्रशासन ने लीपापोती का प्रयास किया। दोपहर 12:30 बजे जब हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी तो बर्मन की मौत की खबर रेलवे अधिकारियों तक पहुंच गई थी। इसके बाद भी रेलवे जीएम और डीआरएम जबवीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाई कोर्ट की सुनवाई में जुड़े तो उन्होंने कोर्ट को यह जानकारी ही नहीं दी। उसकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि इलाज चल रहा है। इस दौरान चीफ जस्टिस रमेशसिन्हा ठेकाकर्मी के बेहतर इलाज और जान बचाने के लिए निर्देश देते रहे। प्रताप की मौत से पत्नी सदमे में हैं। वे न्याय की मांग को लेकर लगातार दूसरे दिन धरने पर बैठी रहीं। इस दौरान उनके पास जो भी अधिकारी पहुंचा, उन्होंने दैनिक भास्कर की खबर दिखाते हुए कहा कि आपने मेरे पति का सही इलाज नहीं कराया गया।


