भास्कर न्यूज |लुधियाना कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने लुधियाना में राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन (नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेक्सटाइल्स) का सफल आयोजन किया। इस दूसरे संस्करण में देशभर के उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत के वस्त्र उद्योग को भविष्य के लिए तैयार करना था, जिसमें नवाचार, स्थिरता, वैश्विक व्यापार अवसरों और पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता उपदीप सिंह (सीईओ, ओडिशा प्रोजेक्ट्स एवं रेजिडेंट डायरेक्टर दिल्ली, वेलस्पन वर्ल्ड) ने की। उन्होंने वैश्विक व्यापार में आए हालिया बदलावों को देखते हुए तत्काल और मिशन-मोड में काम करने की जरूरत बताई। अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 50% तक की भारी टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जिससे कम मार्जिन वाले श्रम-प्रधान उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। यह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने आगे कहा कि हमें फाइबर से लेकर फैब्रिक तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना होगा। आज भी भारत में कपास की उपज मात्र 443 किग्रा/हेक्टेयर है। इसके साथ ही हमें मैन-मेड फाइबर की ओर भी रुख करना होगा और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा जो वैश्विक मांग से मेल खाता हो। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर अभीक सिंघी ने व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य से बात करते हुए कहा कि भारत का घरेलू वस्त्र बाजार $140 बिलियन के करीब है और निर्यात लगभग $40 बिलियन। हमारे पास अगला स्तर छूने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए केवल गुणवत्ता और लागत पर निर्भर रहना काफी नहीं। टेक्नोलॉजी, डिजाइन और स्थिरता को अपनी रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड के एमडी डॉ. रविंदर वर्मा ने लुधियाना की भूमिका पर प्रकाश डाला। लुधियाना का 20,000 करोड़ का वस्त्र उद्योग अब सिर्फ सर्दियों के कपड़ों तक सीमित नहीं रह सकता। हमें सिंथेटिक्स और तकनीकी वस्त्रों जैसे एथलीजर में डाइवर्सिफाई करना होगा। एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट), पीएलआई स्कीम्स और स्मार्ट कॉस्ट स्ट्रेटेजीज़ की मदद से हम साल भर उत्पादन क्षमता का पूरा लाभ उठा सकते हैं। यही भारत के $100 बिलियन निर्यात लक्ष्य को संभव बनाएगा। सम्मेलन में तकनीकी वस्त्रों को भी विशेष महत्व दिया गया। ये स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। सीआईआई पंजाब स्टेट के चेयरमैन और शिंगोरा टेक्सटाइल्स प्रा. लि. के एमडी अमित जैन ने कहा, तकनीकी वस्त्र भारत के लिए नई ग्रोथ फ्रंटियर है। नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन जैसी योजनाओं का सही उपयोग कर, रिसर्च को कॉमर्शियलाइजेशन से जोड़कर और स्किल्ड टैलेंट तैयार करके हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। कंपनियों को चाहिए कि वे इनोवेशन पर खास बजट तय करें। भारत की लीडरशिप तभी कायम रह पाएगी जब हम भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी और सोच में निवेश करेंगे।


