भागवत कथा में मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव:पंडित रामपाल शर्मा शास्त्री बोलें- भक्त ध्रुव की तरह होनी चाहिए

राजसमंद में महावीर नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की जीवंत झांकी सजाई गई। इस दौरान कथा पंडाल में वातावरण कृष्णमय हुआ व श्रोता भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में भजनों पर झूमते दिखे। कथा पंडाल में जब पंडित रामपाल शर्मा शास्त्री जैसलान ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग की शुरुआत की श्रोताओं ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए। चौथे दिन की कथा के दौरान पंडित रामपाल शर्मा शास्त्री ने भक्त ध्रुव के प्रसंग पर कहा कि व्यक्ति को हर समय प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए पता नहीं कब अंत समय आ जाए। उन्होंने कहा कि अंत समय में व्यक्ति की जो मति या बुद्धि होती है, अगले जन्म में उसे उसी प्रकार की उसे गति मिलती है। ‘..तो प्रभु से मिलन होगा’
उन्होंने कहा कि अगर ऐसे में आप अंत समय में प्रभु का स्मरण करेंगे तो प्रभु से आपका मिलन होगा और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। भगवान की भक्ति हो तो महाराज ध्रुव की तरह होनी चाहिए, जिन्होंने साक्षात प्रभु के दर्शन प्राप्त हुए। प्रभु की ओर से उन्हें वरदान मांगने के लिए कहां गया तो भी भक्त ध्रुव ने प्रभु से उनकी कथा का रसपान करते रहने का वरदान ही मांगा। ‘भक्त की भक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए’
उन्होंने कहा कि भगवान के भक्त की भक्ति की निंदा करने वाले व्यक्ति को भी भगवान के कोप का भागी बनना पड़ता है। इसलिए कभी किसी भक्त की भक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जीवन के चार आश्रमों का वर्णन करते हुए गृहस्थ आश्रम को श्रेष्ठ बताया क्योंकि इसमें कर्म की प्रधानता है।
उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार एवं ईर्ष्या रूपी 6 दोष बताएं और कहा कि इन 6 दोषों को त्याग कर भगवान की भक्ति करने पर भगवान भी भक्त के अधीन हो जाते हैं। इसके बाद प्रभु श्री कृष्ण जन्म का प्रसंग पर आकर्षक झांकी सजाई गई और मंच को भी आकर्षक रूप से सजाया गया। भजनों से भक्तिमय बनाया माहौल
इसके साथ ही प्रसंग के अनुसार कानुड़ो लियो अवतार बधाई सारा भक्ता ने, भजन की प्रस्तुति ने वातावरण को कृष्ण मय बना दिया। इसके साथ ही राम नाम के हीरे मोती शोर मचाऊं गली गली, मिलता है सच्चा सुख भगवान तुम्हारी शरण में, मैं हूं शरण तेरी संसार के रचौया कश्ति मेरी उसे पर लगा दो कन्हैया मधुर भजनों पर भी भक्तों ने खूब भक्ति नृत्य किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान व्यवस्थाओं में कथा अनुष्ठान करता जगदीश अग्रवाल, अग्रवाल समाज के गिरीश अग्रवाल, रमेश हरलालका सहित पदाधिकारियों ने सहयोग किया।

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