आज बारिश का अलर्ट नहीं:लुधियाना में सेना बांध मजबूत करने में जुटी; भाखड़ा का जलस्तर डेंजर लेवल से 1.5 फीट नीचे

पंजाब में अगले 4 दिनों तक बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। राज्य के लिए यह राहत की खबर है। अमृतसर के रमदास में रावी नदी के कारण टूटे 8 धुस्सी बांधों को भरने के प्रयास शुरू हो चुके हैं, जबकि 5 बांधों तक पहुंचने का प्रयास जारी है। पठानकोट से तरनतारन तक जलस्तर में कमी देखने को मिली है। दूसरी तरफ, पहाड़ों पर भी 9 सितंबर तक बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। शुक्रवार रात 9 बजे भाखड़ा बांध का जलस्तर लगभग 1678.40 फीट दर्ज किया गया, जो अब खतरे के निशान से लगभग डेढ़ फीट कम है। भाखड़ा में पानी की आवक कम होने के कारण यह कमी देखने को मिली है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए भाखड़ा से लगभग 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिसमें से लगभग 50 हजार क्यूसेक पानी ही सतलुज में छोड़ा जा रहा है। भाखड़ा से छोड़े गए पानी का असर रूपनगर से लेकर लुधियाना व उससे आगे हरिके हेडवर्क तक देखने को मिल रहा है। बीते दिन लुधियाना के ससराली गांव में धुस्सी बांध की मिट्टी खिसक गई, जिसके बाद सेना को वहां बुलाया गया और अभी तक बांध को बचाने का काम सेना व प्रशासन मिलकर कर रहे हैं। अमृतसर में 5 जगहों पर नहीं पहुंच पा रही मशीनरी
अमृतसर में जल संसाधन विभाग के एक्सईएन गुरबीर सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर घटने और पहाड़ों से पानी कम आने के कारण खेतों का पानी अब वापस नदी में लौट रहा है। ऐसे में मरम्मत तेजी से आगे बढ़ रही है। घोनेवाल, माछीवाल और कोट रजादा में धंसानों को भरने का काम शुरू हो गया है। हालांकि, 5 अन्य स्थानों पर अभी मशीनरी और ट्रैक्टर-ट्रक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहां पहुंच बनाने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। जैसे ही रास्ता तैयार होगा, वहां भी काम शुरू कर दिया जाएगा। सांप काटने के बाद केस रेफर
वहीं, रोपड़ में भी बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जानकारी दी कि बीती शाम रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एनडीआरएफ की एक बोट की हवा लीक हो गई। इसका कारण पानी कम होना बताया जा रहा है, जिसके बाद एनडीआरएफ की अन्य नौकाओं को भेजकर स्थिति संभाली गई। इसके साथ ही इलाके में सांप काटने का एक मामला भी सामने आया। हालत गंभीर होने के बाद केस को सेक्टर 32 के सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया है। पंजाब में बाढ़ की मौजूदा स्थिति… 23 जिलों में बाढ़ का असर: 23 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, संगरूर, एसएएस नगर, श्री मुक्तसर साहिब, एसबीएस नगर और तरनतारन शामिल हैं। 1948 गांव डूबे: राज्य के 1948 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। अमृतसर के 190, गुरदासपुर के 329, बरनाला के 121, बठिंडा के 21, फिरोजपुर के 102, होशियारपुर के 169, कपूरथला के 145, पठानकोट के 88, मोगा के 52, जालंधर के 74, फाजिल्का के 79, फरीदकोट के 15, लुधियाना के 64, मुक्तसर के 23, एसबीएस नगर के 28, एसएएस नगर के 15, संगरूर के 107 और मानसा के 95 गांव ज्यादा प्रभावित हैं। इसके अलावा मलेरकोटला के 12, पटियाला में 105, रूपनगर में 44 और तरनतारन में 70 गांव पानी में घिरे हुए हैं। 3.84 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित: कुल 3,84,322 से अधिक लोग अब तक प्रभावित हो चुके हैं। सबसे ज्यादा असर अमृतसर (1,35,880), गुरदासपुर (1,45,000) और फाजिल्का (24,212) में देखने को मिला है। इसके अलावा फिरोजपुर, कपूरथला, मोगा, संगरूर और मोहाली में भी हजारों लोग संकट में हैं। 43 लोगों की अब तक मौत हुई: अब तक 12 जिलों में 43 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें अमृतसर (5), बरनाला (5), बठिंडा (4), होशियारपुर (7), लुधियाना (4), मानसा (3), पठानकोट (6), गुरदासपुर (2), एसएएस नगर (2), फिरोजपुर (1), फाजिल्का (1), रूपनगर (1), पटियाला (1) और संगरूर (1) शामिल हैं। पठानकोट जिले से 3 लोग लापता हैं। वहीं, पशुधन हानि का सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन बड़ी संख्या में पशु बाढ़ की चपेट में आए हैं। 21,929 लोगों को सुरक्षित निकाला: कुल 21,929 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला गया है। इनमें फिरोजपुर में 3804, अमृतसर से 2734, बरनाला से 539, होशियारपुर से 1615, कपूरथला से 1428, जालंधर से 511, मोगा से 145, रूपनगर से 245, पठानकोट से 1139 और तरनतारन से 21 लोग शामिल हैं। 196 राहत शिविर सक्रिय: राज्यभर में 196 राहत शिविर सक्रिय हैं, जिनमें अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मोगा, मोहाली, पठानकोट, पटियाला, रूपनगर, संगरूर और एसएएस नगर शामिल हैं। इन शिविरों में 6755 लोग रह रहे हैं। बाढ़ से अब तक 1,72,323 हेक्टेयर फसल प्रभावित: पंजाब में बाढ़ से अब तक 1,72,323 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान गुरदासपुर (40,169) में हुआ।

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