लुधियाना | मानसून का मौसम जहां ठंडक का एहसास कराता है, वहीं यह त्वचा की कई दिक्कतें भी साथ लाता है। हवा में नमी बढ़ने से पसीना और चिपचिपाहट बढ़ जाती है। नतीजा बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का खतरा। कई लोग सोचते हैं कि बारिश में सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती। जबकि हकीकत यह है कि बादलों के बीच से भी यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं। मुल्तानी मिट्टी, एलोवेरा जेल या हल्दी पैक त्वचा को ठंडक देते हैं।


