किसान मजदूर मोर्चा की अहम बैठक दिलबाग सिंह हरिगढ़ और बलवंत सिंह बहरामके की अध्यक्षता में हुई। बैठक में बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करते हुए नेताओं ने कहा कि यह आपदा प्राकृतिक से अधिक सरकारी लापरवाही का परिणाम है। खराब जल प्रबंधन और प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण ही पंजाब को बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में फैसला लिया गया कि किसानों के खेतों में जो रेत भर गई है, उसे किसान स्वयं बेच सकेंगे। यदि सरकार या खनन विभाग इसमें कोई अड़चन डालता है, तो मोर्चा इसका तीव्र विरोध करेगा। नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब देश का अन्नदाता है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र ने अब तक बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया, जो पंजाब के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर केंद्र सरकार तुरंत राहत के लिए बड़ा फंड जारी करे। सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि लोग अपने हाल पर खुद संघर्ष कर रहे हैं, जबकि सरकार मैदान से गायब है। 12 सितंबर को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पंजाब के सभी डिप्टी कमिश्नरों को मांग-पत्र सौंपें जाएंगे।


