नरेंद्र अ ग्रवाल/ मनोज सिन्हा | सिमडेगा नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 5 से 22 सितंबर तक आयोजित हो रहे सरस आजीविका मेला में सिमडेगा जिले से समूह की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से नई पहचान बना रही हैं। झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (जेएसएलपीएस) के सहयोग से ब्रांड पलाश के तहत प्रदर्शित किए जा रहे स्थानीय उत्पाद खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।सिमडेगा के कोलेबिरा प्रखंड की रहने वाली ब्रिजिट कंडुलना इस वर्ष दूसरी बार दिल्ली के सरस मेला में भाग ले रही हैं। उनके स्टॉल नंबर 149 पर मड़ुआ से बने उत्पाद ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। पहले ही दिन उन्होंने 15 हजार रु से अधिक की बिक्री की है। उन्होंने बताया कि घर की जिम्मेदारियों के बीच जब उन्होंने मां बाघचंडी आजीविका सखी मंडल से जुड़कर स्वयं सहायता समूह की शक्ति को अपनाया, तो उनकी ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया। समूह के माध्यम से उन्हें ऋण मिला और उन्होंने मडुआ (रागी) की खेती शुरू की।धीरे-धीरे खेती के साथ उन्होंने सोचा कि क्यों न मडुआ से बने मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएँ। उन्होंने मडुआ लड्डू, मड़ुआ चनाचूर, मडुआ पापड़, सफेद और काले तिल के लड्डू, अचार और मधुरस जैसे उत्पाद बनाना शुरू किया। जेएसएलपीएस और ब्रांड पलाश के सहयोग से ब्रिजिट को अपने उत्पाद बेचने का स्थायी मंच मिला। उनके उत्पाद पलाश मार्ट, विभिन्न मेलों और स्थानीय बाज़ार में बिकने लगे। गुणवत्ता और परंपरागत स्वाद के कारण इन उत्पादों को ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया।उनकी लगातार मेहनत और लगन ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में ला खड़ा किया। आज वह सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं, बल्कि अपने इलाके की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।ब्रिजिट की सफलता कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि सामूहिकता, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किस तरह ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल सकता है। ब्रिजिट ने कहा कि सखी मंडल से जुड़कर उन्हें नई दिशा मिली। अब वे न सिर्फ अपने परिवार को संभाल रही हैं बल्कि अपने जिले और राज्य का नाम रोशन कर रही हैं।


