भास्कर न्यूज | चतरा जिले में झोला-छाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों की लापरवाही से लगातार हो रही गंभीर घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। हाल ही में दो मरीजों की मौत के बाद प्रशासन ने संबंधित डॉक्टरों एवं संचालकों के विरुद्ध क्लीनिकल एस्टेबलिश्मेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराते हुए सख्त संदेश दिया है। महिला की मौत के बाद कार्रवाई 2 सितंबर को हंटरगंज प्रखंड के नावाडीह स्थित जीवन रेखा क्लिनिक में प्रसव पीड़ा से पीड़ित रंजु देवी (23 वर्ष) का बिना जांच ऑपरेशन किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतका के पति के आवेदन पर झोला-छाप डॉक्टर विकेश कुमार यादव, रामधीर कुमार एवं सुनिल कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। क्लिनिक को तत्काल सील कर दिया गया। इंजेक्शन लगने से किशोर की मौत : 1 सितंबर को वशिष्ठनगर जोरी थाना क्षेत्र के ग्राम डेमडेम नावाडीह निवासी ऋषि कुमार (05 वर्ष) की झोला-छाप डॉक्टर प्रदीप विश्वकर्मा द्वारा दिए गए तीन इंजेक्शनों के बाद हालत बिगड़ गई। मगध मेडिकल कॉलेज, गया पहुंचते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। झोला-छाप चिकित्सकों और अवैध नर्सिंग होम को कतई बख्शा नहीं जाएगा : डीसी : उपायुक्त कीर्तिश्री जी ने कहा कि जिले में झोला-छाप चिकित्सकों और अवैध नर्सिंग होम को कतई बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने अनुमंडलवार जांच समितियों का गठन किया है, जिसमें एसडीओ, चिकित्सा पदाधिकारी, कार्यपालक दंडाधिकारी एवं अंचल अधिकारी शामिल हैं।उपायुक्त ने नागरिकों से अपील की है कि वे इलाज के लिए हमेशा पंजीकृत चिकित्सकों और मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों का ही सहारा लें। किसी भी संदिग्ध क्लिनिक या झोला-छाप डॉक्टर की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।


