15वें वित्त आयोग की अनुशंसा से मार्च 2026 तक 2300 करोड़ रुपए मिलने की संभावना है। वर्तमान दार में पहले चरण में करीब 1200 करोड़ और दूसरे चरण में करीब 1000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। राज्य के लिए केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसित राशि का प्रतिशत जिला परिषद व पंचायत समिति के लिए और 70 प्रतिशत ग्राम पंचायत के लिए मिलना है। वर्ष 2021-2026 के लिए कुल 12,322 करोड़ रुपए मिलना था। इसमें 535 करोड़ ग्रामीण क्षेत्र, 37 करोड़ शहरी क्षेत्र और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 2470 करोड़ रुपए तय हैं। मालूम हो कि पिछले सप्ताह केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सचिव के साथ राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक की थी। उसके बाद उन्होंने कहा था कि जल्द ही 15वें वित्त आयोग के अनुदान का पैसा झारखंड के लिए रिलीज होगा। उल्लेखनीय है कि 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा पर वर्ष 2023-24 तक की राशि मिल गई है। वर्ष 2024-25 में 1642 करोड़ रुपए और 2025-26 में 1094 करोड़ रुपए राज्य की पंचायती राज संस्थाओं को मिलना है। राज्य गठन से 2024 तक एटीआर पेश नहीं हुई राज्य में वित्त आयोग लंबे समय से निष्क्रिय था। इस कारण झारखंड गठन के बाद वर्ष 2024 तक विधानसभा में आयोग की अनुशसाओं के क्रिया क्यन पर एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) पेश ही नहीं हो सकी। पंचायती राज व्यवस्था के तहत राज्य वित्त आयोग के गठन में देरी के कारण यह स्थिति बनी। इसका सीधा असर नगर निकायों और पंचायती राज योजनाओं पर पड़ा। बता दें कि दो साल केंद्रीय पहले पंचायती राज मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में अनुदान जारी रखने के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करने का निर्देश दिया था। इसमें सभी ग्रामीण निकायों के पास पिछले साल का अंतरिम लेखा और इससे पहले ऑडिट किए गए अकाउंट देने की अनिवार्यता थी। राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाएं की एटीआर को विधानसभा में पेश होना जरूरी है। अगर किसी राज्य ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया हो, तो वह मार्च 2024 तक इसे पूरा करें। ऐसा नहीं होने पर संबंधित राज्यों के स्थानीय ग्रामीण निकायों को 2024-25 में अनुदान नहीं मिलेगा। लेकिन उस समय राज्य सरकार ऐसा कर नहीं सकी। इस वर्ष राज्य सरकार ने विधानसभा में पेश कर दी है एटीआर एपी सिंह की अध्यक्षता में बनी पंत्तम राज्य वित्त आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है। आयोग की अनुशंसाएं की एटीआर भी इस वर्ष विधानसभा में पेश हो गई है। इस आधार पर केंद्र से अनुदान की राशि रिलीज होने की संभावना है। 50% खर्च के बाद ही राशि का दावा इधर, मुख्य सचिव अलका तिवारी ने पिल्ले सप्ताह एक बैठक कर 15 अक्टूबर तक स्वास्थ्य मद की 50 प्रतिशत राशि खर्च करने निर्देश दिया था। कहा था कि 50 प्रतिशत राशि खर्च होने के बाद ही केंद्र से 1020 करोड़ की बकाया राशि पर दावा किया जा सकता है। अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह व अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में 15वें वि। आयोग की 50 प्रतिशत राशि का खर्च अक्टूबर के मध्य तक सुनिश्चित करने का निर्देश सभी जिलों के उपायुक्तों को दिया था।


