भास्कर न्यूज| चाईबासा चाईबासा मुख्यालय सहित पूरे जिले में अवैध तरीके से पांच दर्जन से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। नियमत: प्लांट का खाद्य सुरक्षा विभाग में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जबकि प्लांट लगाने के लिए लाइसेंस का होना पहली शर्त है। उसके बाद भी चाईबासा में डेढ़ दर्जन से अधिक कारोबारी प्रतिदिन केन व जार के माध्यम से हजारों लीटर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। गंभीर बात यह है कि जो पानी लोगों को पिलाया जा रहा है, वह शुद्ध है या नहीं, इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए कोई पैरामीटर नहीं है। प्लांट में पानी शुद्ध करने के चक्कर में रोजाना हजारों लीटर पानी की बर्बादी की जा रही है। पश्चिमी सिंहभूम जिले में कुल 19 फर्म का आरओ प्लांट के माध्यम से जार वाला पानी विक्रय हेतु खाद्य सुरक्षा विभाग, चाईबासा में रजिस्ट्रेशन है। वहीं दूसरी ओर जिले भर में मात्र 3 फर्म को ही स्टेट लाइसेंस प्राप्त है। जिनका सालाना टर्नओवर 12 लाख से ऊपर है। जबकि चाईबासा शहर का कोई भी फर्म स्टेट लिस्ट में शामिल नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग में एकमात्र पदाधिकारी व एक संविदा कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर के जिम्मे पूरे जिले का कार्यभार है। जिसके कारण आरओ प्लांट संचालक अवैध कार्य बिना डर के आराम से कर रहे हैं। वाटर प्लांट में आरओ सिस्टम तो है, लेकिन पानी की जांच के लिए लैब नहीं है। वाटर प्लांट को आईएसआई सर्टिफाइड होना चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग में पानी के प्लांट का रजिस्ट्रेशन नहीं है। फूड सेफ्टी एक्ट के अनुरूप साफ-सफाई आदि भी इन प्लांटों में नहीं रखते हैं। वाटर प्लांट चालू करने से पहले ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड का लाइसेंस भी होना जरूरी है। डॉ. शिवचरण हांसदा, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, चाईबासा। बिना लाइसेंस और बिना गुणवत्ता की जांच के उपयोग किया जा रहा पानी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। लंबे समय तक इस प्रकार के पानी के उपयोग से स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हड्डी कमजोर होने संबंधी रोग, पेट दर्द, दस्त, उल्टी और अन्य संक्रमण आदि हो सकता है। यह विशेष रूप से चिंता का विषय है। वॉटर टेक्निकल चंदना बिस्वाल, टेक्निकल मैनेजर, डीएलडब्लूटी, लैबोरेंट्री, चाईबासा। सजगता : गुणवत्तापूर्ण पानी का पीएच मानक के साथ नमक, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, नाइट्रेट, सल्फेट व अन्य घुले ठोस पदार्थ नियमित मात्रा आदि का नियमित रूप से परीक्षण किया जाना चाहिए। सरकारी लैब में 300 से 600 सौ रुपए में जल की गुणवत्ता जांच करने की व्यवस्था है।


