भास्कर न्यूज | जालंधर जय श्री राम महाबीर क्लब दशहरा ग्राउंड बस्ती शेख के सदस्यों द्वारा आयोजित श्री रामलीला मंचन में सीता स्वयंवर का दृश्य दिखाया गया। दशहरा ग्राउंड में श्री रामलीला का मंचन का विधि-विधान के साथ शुरूआत की गई। हनुमान चालीसा पाठ कर व ज्योति प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। क्लब के मेंबरों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के सारे प्रबंध किए गए। शुक्रवार को रामलीला के मंचन के दूसरे दिन राम विद्या, सीता स्वयंवर अध्ययन आदि लीलाओं का मंचन किया गया। सीता स्वयंवर : राजा जनक के मन में अपनी पुत्री सीता के प्रति स्नेह था। राजा जनक ने माता सीता के लिए वर का चयन करने के लिए सीता स्वयंवर का आयोजन किया। सीता स्वयंवर में एक शर्त रखी थी कि जो महान व्यक्ति शिव धनुष को उठाकर तोड़ सकेगा, उसी वीर के साथ मां सीता का विवाह तय कर दिया जाएगा। राजा जनक महामंत्री को बुलाते हैं – महामंत्री : जी महाराज -जनक : हमारी प्रतिज्ञा सभी क्षेत्रीय मंडल को सुना दी जाए। – महामंत्री : जो आज्ञा महाराज -काशी नरेश : बोधी पुरानी धनुष पर इतना गुमान है। भारी है तो क्या हुआ आखिर कमान है। चाहूं तो एक हाथ से ही तोड़ दूं इसे किस बात पर उठाया सिर पर आसमान है। भाट- ऐ राज सभा में पधारे क्षत्रिय वीरों, आज आपके बल और वीरता की परीक्षा का समय है। जिस किसी को अपनी वीरता पर भरोसा है वही आगे आएं और इस धनुष का चीला चढ़ाएं। जो क्षत्रिय वीर इस धनुष का चीला चढ़ाएगा। वो राज कुमारी सीता का पति कहलाएगा। इसलिए आओ और अपनी वीरता का जौहर दिखाओ। सीता स्वयंवर में कई शक्तिशाली राजकुमारों ने हिस्सा लिया। वहीं, दशानन रावण भी शामिल हुआ, लेकिन रावण शिव धनुष को उठा नहीं पाया। अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस कारण रावण इतना शक्तिशाली होने के बाद भी शिव धनुष को उठा नहीं पाया। रावण भगवन शिव का परम भक्त था। उन्होंने एक बार कैलाश पर्वत तक उठा लिया था, लेकिन सीता स्वयंवर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। क्योंकि महादेव के इस धनुष को उठाने के लिए प्रेम और उदारता का होना जरूरी था, जो रावण में नहीं था। इसलिए रावण धनुष को नहीं उठा सका। इसके बाद प्रभु श्री राम जी आए, तो उन्होंने धनुष को प्रणाम कर उठाकर तोड़ दिया। ये मेंबर रहे मौजूद : विजय लूथर, सुभाष शर्मा, नरिंदर वोहरा, दविंदर कक्कड़, चेयरमैन शिव नाथ कंडा, वाइस चेयरमैन राजिंदर कपूर, प्रधान संजीव मेहता, सीनियर उप प्रधान सुनील सौंधी, सीनियर उप प्रधान वरिंदर कुमार, उप प्रधान राहुल लूथर, विजय कुमार, पवन लूथर, वेद प्रकाश, अमित कुमार, पवन अरोड़ा, सुमीत शर्मा, रवि बग्गा, मोहित कुमार, कृष्णा, दीपक तनेजा व अन्य मेंबर शामिल है। रावण को अपनी शक्ति का बेहद घमंड था। इसलिए वह शिव धनुष को नहीं उठा सका। जिससे उसका घमंड टूटा और उसे अपनी हार का सामना करना पड़ा। वह धनुष उठाने में असफल रहा, जो उसकी सबसे बड़ी हार थी। इस दृश्य में हमें यह शिक्षा मिलती है कि अपनी शक्ति पर अत्यधिक घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अंततः यह अहंकार ही विनाश का कारण बनता है। स्वयंवर सीता के दौरान प्रभु श्री राम के स्वरूप में कलाकार धनुष उठाने से पहले नमस्कार करते हुए। (दाएं) प्रभु ने जैसे ही धनुष उठाया, राम भक्तों में जोश आ गया। पंडाल से जै श्री राम के जैकारे गूंज उठे।


