भास्कर न्यूज| दंतेवाड़ा विश्वकर्मा जयंती का कार्यक्रम एनएमडीसी के खदान क्षेत्रों में उत्साह पूर्वक मनाया जाना है। वर्ष के इस एक दिन एनएमडीसी की सभी खदानें पूर्ण रुप से बंद रहती हैं। इसी एक दिन के लिए आसपास रहने वालों के साथ छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से भी सैलानी बैलाडीला पहुंचते हैं। साथ-साथ सीमांत राज्यों जैसे ओडिशा, आंध्र एवं तेलंगाना से भी लोग बैलाडीला की खूबसूरत पहाड़ियों में स्थित एनएमडीसी द्वारा संचालित लोहे की खदानों के साथ-साथ बैल की डील के आकार के पहाड़ों एवं सर्पीले रास्तों को निहारने आते हैं। पिछले 2 वर्षों से सुरक्षा का हवाला देकर या अति वर्षा एवं भूस्खलन की बात कह सैलानियों की आवाजाही पर पाबंदी लगाई जा रही है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। नगरपालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने बताया कि साल में एक ही दिन मिलता है जब लोग बैलाडीला के पहाड़ियों को निहारने दूर-दूर से आते हैं इससे शहर का माहौल भी बदलता है शहर की आर्थिक व्यवस्था भी कई गुना ज्यादा हो जाती है। छोटे व्यापारी, होटल और लॉज चलाने वाले, टैक्सी वाले आदि सभी को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। सैलानियों पर प्रतिबंध लगाने से शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। एक तरफ जिला प्रशासन दंतेवाड़ा जिले को एक पर्यटन जिला के रूप में विकसित करने का हरसंभव प्रयास कर रहा है इसके लिए करोड़ों रुपए भी खर्च किए जा रहे हैं दूसरी ओर एनएमडीसी का यह प्रतिबंधात्मक रवैया समझ से परे है। किरंदुल के नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने एनएमडीसी प्रबंधन से पत्र के माध्यम से निवेदन किया है कि 17 सितंबर विश्वकर्मा जयंती के दिन बाहर से आए हुए सैलानियों पर लगाए गए प्रतिबंध के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और सैलानियों को बैलाडीला की खदानें एवं खूबसूरत पहाड़ियों को निहारने की अनुमति दी जाए। आकाश नगर और कैलाश नगर पहुंचते हैं हजारों लोग एनएमडीसी बचेली और किरंदुल के द्वारा अभी तक आधिकारिक रूप से आकाश नगर और कैलाश नगर जाने के लिए प्रतिबंध सबंधी कोई पत्र जारी नहीं किया गया है, एक-दो दिनों में स्थित स्पष्ट करने की जानकारी पूर्व में दी गई थी, पर लोगों में इस बात की चर्चा है कि इस बार विश्वकर्मा पूजा पर भी पहाड़ों में जाने की छूट नहीं रहेगी। विश्वकर्मा पूजा पर किरंदुल में कैलाश नगर में हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं।


