भास्कर न्यूज| अमृतसर रणजीत एवेन्यू में 3.75 एकड़ जमीन पर बन रहे अवैध मल्टीप्लेक्स के निर्माण का काम रुकवाने के लिए 4 महीने पहले डिफेंस ने सीपी को लैटर भेजा था। लेकिन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट-पुलिस की तरफ से कोई बड़ी कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी। मानो आर्मी की तरफ से जारी लैटर ट्रस्ट-पुलिस के लिए कोई मायने ही नहीं रखते हैं। हैरानी तो यह है कि आर्मी के दायरे में जगह आने के बावजूद मल्टीप्लेक्स का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है। भविष्य में देश की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही। लेकिन जिम्मेदार विभागों के अफसरों की कार्रवाई महज अवैध निर्माण रोकने तक ही सीमित है। बता दें कि बिना सेना से परमिशन लिए इस जगह पर कोई निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन सारे नियम कानून मानों गरीबों की बिल्डिंग व अतिक्रम हटाने तक सीमित रह गई हैं। ट्रस्ट जिस तरह से कार्रवाई कर रहा, दिखावे का प्रतीत होता है। चूंकि मल्टीप्लेक्स का निर्माण अंदरखाते कभी रुकवा दिया जाता है तो बाद में फिर सेटिंग करके ट्रस्ट के अफसर चालू भी करा देते हैं। 2 साल से अवैध निर्माण चल रहा और ग्राउंड फ्लोर से लेकर डबल स्टोरी का डिजाइन बनाया जा चुका है। लेकिन ट्रस्ट की तरफ से न तो पर्चा दर्ज करवाया जा सका न ही अवैध बिल्डिंग तोड़ी जा सकी। यह बात अलग है कि मल्टीप्लेक्स से महज 200 मीटर दूरी पर एक गरीब का 70 साल पुराना मकान ट्रस्ट डेढ़ माह पहले जेसीबी से तोड़कर चलते बने थे। जबकि मामले को लेकर पहले से कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। दरअसल, स्टेशन हेडक्वार्टर कैंटोनमेंट बोर्ड ने बीते 23 मई को सीपी को पत्र लिखकर बताया था कि ओल्ड कैंटोनमेंट के 100 मीटर के दायरे में होटल बनाया जा रहा है, जो 18 मई 2011 की एनओसी गाइडलाइन का उल्लंघन है। डिफेंस ने निर्माण कार्य तुरंत रुकवाने की मांग की थी। इसके तीन दिन बाद 28 मई को सीपी दफ्तर से डायरी नंबर लगाकर यह पत्र कार्रवाई के लिए रणजीत एवेन्यू के एसएचओ को भेजा गया था। इस संबंधी जब ट्रस्ट चेयरमैन करमजीत सिंह रिंटू से पूछा गया कि क्या निर्माण की मंजूरी दे दी गई है तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। सीनियर एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि रणजीत एवेन्यू में आर्मी की जगह पर अवैध मल्टीप्लेक्स बनाया जा रहा है। भविष्य में देश की सुरक्षा को खतरा बन सकता है। केंद्र-राज्य सरकारों को इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए। अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिए जाने को लेकर वर्तमान इंप्रूवमेंट ट्रस्ट चेयरमैन व अफसरों और पुडा प्रशासक व अफसरों के अलावा पुलिस-जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। आम लोगों का निर्माण अवैध होता तो अब तक ट्रस्ट की जेसीबी और सैकड़ों पुलिस ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ पहुंच कर तोड़फोड़ कर चुकी होती। आप सरकार में हर किसी को उम्मीद है कि गलत कामों को सख्ती से रोका जाएगा। लेकिन अफसर छवि खराब करने में लगे हुए हैं। बता दें कि दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से अवैध मल्टीप्लेक्स निर्माण कराने का मुद्दा प्रकाशित किया था। जिसके बाद इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के अफसरों ने काम रुकवा दिया था। साथ ही पर्चा दर्ज कराने की चेतावनी भी जारी की गई। लेकिन ग्राउंड लेवल पर हकीकत कुछ अलग है। चंडीगढ़ से एक उच्च अफसर की सिफारिश पर अवैध निर्माण फिर से इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने शुरू करा दिया है। जबकि सेना की जगह के 100 मीटर दायरे में आने के कारण डिफेंस मिनिस्ट्री की बिना मंजूरी निर्माण नहीं करवाया जा सकता है। जो 18 मई 2011 की एनओसी गाइडलाइन का उल्लंघन है। डिफेंस ने निर्माण कार्य तुरंत रुकवाने की मांग की थी। लेकिन सारी कार्रवाई आर्मी से लेकर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, पुलिस और प्रशासन की लैटर-बाजी तक ही सीमित रह गई है।


