आयुष्मान में कमीशन का खेल…:अस्पतालों से 5000 तक पाने एजेंट गाड़ियों से लोगों को ओडिशा से भिलाई-रायपुर ला रहे

9 मरीजों के साथ अस्पताल पहुंचा एजेंट, मरीजों की सौदेबाजी करते कैमरे में कैद दुर्ग जिले के कई निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के इलाज में धांधली चल रही है। एजेंट गाड़ियों से ओडिशा के लोगों को यहां लाते हैं। उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। इसके बदले में अस्पताल एजेंट को प्रति व्यक्ति तीन से पांच हजार रुपए कमीशन देते हैं। जबकि अस्पताल खुद कमर दर्द में भी 90 हजार से एक लाख रुपए तक बिल बनाते हैं। इन अस्पतालों में भर्ती एक मरीज की सूचना पर भास्कर ने स्टिंग किया तो भिलाई के दो अस्पतालों व ओडिशा के दो दलालों का खुलासा हो गया है। ओडिशा के 9 लोगों को अपने साथ लाया एक दलाल भिलाई-3 के अमित मेमोरियल अस्पताल पहुंचते ही कैमरे में कैद हुआ। दूसरे ने फोन पर हुई बातचीत में कुम्हारी के कुष्णा अस्पताल में कथित मरीज पहुंचाना बताया है। भास्कर रिपोर्टर ने अस्पताल का संचालक बनकर दोनों से बात की। उन्होंने कहा कि आप यदि कमीशन दें तो आपके अस्पताल में भी ओडिशा से लोग ला सकते हैं। इसके बाद भास्कर ने पड़ताल की तो दोनों अस्पतालों में ओडिशा के कई लोगों को कमर दर्द, घुटना दर्द, बदन दर्द जैसी मामूली परेशानियों के चलते भर्ती किया जाना पाया गया। ओडिशा के लोगों को इलाज के नाम पर लाने का कारण- छत्तीसगढ़ के आयुष्मान कार्ड धारी प्रसव, बवासीर, मोतियाबिंद, बच्चा दानी और हाइड्रोसिल का ऑपरेशन नहीं करा सकते हैं। इनका इलाज केवल सरकारी में होगा। दूसरी ओर, ओडिशा सरकार अपने लोगों बीजू कार्ड से सभी बीमारियों का इलाज सरकारी या निजी अस्पतालों में कराने का लाभ देती है। इसका फायदा उठाने दोनों राज्यों में मेडिकल माफिया सक्रिय है। मालिक- अस्पताल किराए पर दे दिया, संचालक- ईमानदारी से चला रहे: अमित मेमारियल, भिलाई-3 के मालिक डॉ. कौशल और कृष्णा अस्पताल, कुम्हारी के मालिक डॉ. अमित हैं। दोनों स्वयं डॉक्टर हैं, लेकिन अपना अस्पताल नहीं चला पाए। डॉ. कौशल के मुताबिक उन्होंने रायपुर के डॉ. मनोज पोपतानी को और डॉ. अमित के अनुसार उन्होंने डॉ. पटेल को अपना-अपना अस्पताल किराए पर दे दिया है। अचरज की बात यह है कि संचालक बदलते ही वहां ओडिसा के मरीजों की भीड़ लगने लगी। नए संचालकों में डॉ. मनोज पोपतानी ने कहा कि वे किसी एजेंट को नहीं जानते हैं। उनके यहां मरीजों की सभी जांच कराई जाती है। कोई भी जांच कर सकता है। कृष्णा अस्पताल की तरफ से डॉ. दिनेश ने कहा कि उनका भी किसी पीआरओ से संपर्क नहीं है। पूरी तल्लीनता से उपचार करते हैं। एक भी फर्जी मरीज नहीं रखते हैं। 7 अगस्त, 8:59 am : फाइल में जो भर्ती, वह अस्पताल में घूमते हुए मिला ए.एम अस्पताल, भिलाई-3 के प्रथम तल के वार्ड में 6 व 7 बेड पर भर्ती बरगढ़ निवासी दोनों मरीजों को सिर्फ कमर और घुटने में दर्द था। बेड 8, 9, 11, 12 और 13 तथा तीसरे तल के तीनों कमरे में भर्ती 9 लोग भी घुटने व बदन में दर्द बता रहे हैं। कुछ मरीजों ने पाइल्स की परेशानी भी बताई। राउंड पर पहुंचे डॉक्टर सबके पास जा-जाकर फाइल में नोट्स लिख रहे थे। तीसरे तल पर जिन्हें भर्ती दिखाया था, उनमें में दो पूरे अस्पताल में घूम रहे थे। यहीं नहीं, ओडिशा वासी को हिंदी समझाने उनके साथ उ​ड़िया और हिंदी की ट्रांसलेटर भी पहुंची थी। 7 अगस्त, 9:53 am : युवक को पता ही नहीं था कि उसे क्यों भर्ती किया गया कृष्णा अस्पताल, कुम्हारी के प्रथम तल के वार्ड में दाईं ओर 4 बिस्तर के आईसीयू से सटी दीवार से लगे बेड पर दो लोग और बाएं ओर स्वस्थ्य महिला बैठी थी। राउंड डॉक्टर महिला से परेशानी पूछकर फाइल बना रहे थे। सामने के बेड पर भी कुछ लेटे-बैठे थे। पैंट-शर्ट पहने युवक से पूछा- क्यों भर्ती हुए। जवाब मिला, पता नहीं। आईसीयू में भर्ती 4 लोग टी-शर्ट, लोअर में थे। एक व्यक्ति के मुताबिक ओडिशा से कुल 42 लोग एक साथ पहुंचे हैं। दूसरे तल पर भर्ती किए गए अधिकतर लोगों को भी सिर्फ बदन और घुटने के दर्द की परेशानी थी। मैं इतने लोगों को लाऊंगा कि आप संभाल नहीं पाओंगे: एजेंट स्वस्थ व्यक्ति को मरीज बनाकर अस्पतालों भर्ती करना गलत है। दोषी पाए जाने पर FIR, अस्पताल का लाइसेंस व डॉक्टर की संलिप्तता में पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान है। फर्जी मरीज के नाम सामने आते हैं तो अस्पतालों समेत अन्य पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. धर्मेद्र गवई, राज्य नोडल, आयुष्मान रायपुर में भी एजेंट सक्रिय
बच्चे का पैर टूटने और बुखार का पता चलते ही एजेंट सक्रिय, ओडिशा से रायपुर लाए केस-1 ओडिशा के उमरकोट गांव के विप्लव हरिजन ने बताया कि एक्सीडेंट में बड़े बेटे का पैर टूट गया था। वह अस्पताल में भर्ती था। वहां पड़ोसी गांव का युवक बीजू कार्ड से अच्छा इलाज दिलवाने का वादा कर रायपुर में तेलीबांधा के मेडलाइफ अस्पताल ले आया। यहां एक हफ्ते से बेटा एडमिट है। अस्पताल वाले कहते हैं, बेटे का इलाज चल रहा है। मुझे यहां लाने वाले युवक ने बताया कि वह सभी को इसी अस्पताल में लाता है। केस-2 ओडिशा के बुर्ला गांव निवासी एक युवक ने बताया कि मेरे चाचा को बुखार आ गया था। तब अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां एक आदमी ने संपर्क किया। उसके बाद वह चाचा को अच्छा इलाज कराने का वादा कर रायपुर के मेडलाइफ अस्पताल ले आया। चाचा 2 दिन से अस्पताल में भर्ती है। नाम पूछने पर भतीजे ने कहा कि मैं यहां लाने वाले युवक का नाम नहीं जानता, लेकिन वह कई लोगों को यहां ला चुका है।​​​​​​​

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