महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने साल 2019-20 में सेरी खेड़ी में मल्टी-यूटिलिटी सेंटर बनाया गया। इसे बनाने में तत्कालीन सरकार 5 करोड़ खर्च किए। इस मॉडल सेंटर में 200 से अधिक स्व-सहायता समूह की महिलाएं काम करती थीं। उनके लिए 20 से अधिक योजनाएं संचालित होती थी, लेकिन सरकार बदलते ही ये सब कुछ बंद हो गया। महिलाओं से रोजगार छिन गया और मल्टी-यूटिलिटी सेंटर कबाड़ हो गया है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब यही मल्टी यूटिलिटी सेंटर प्राइवेट हाथों में दिया जा रहा है। जिला पंचायत ने प्राइवेट वेंडर्स को डोम के भीतर 5 रुपए स्क्वेयर फीट और डोम के बाहर शेड में 4 रुपए स्क्वेयर फीट के हिसाब से दिया गया है। जो वेंडर जितनी जमीन लेगा, उसको बिजली बिल से साथ उतना पैसा देना पड़ेगा। वर्तमान में चार से अधिक वेंडर्स को यूटिलिटी सेंटर में जमीन अलॉट भी कर दिया गया है। यही नहीं वेंडर्स के लिए सेंटर में मरम्मत कार्य भी सरकारी पैसे से कराया जा रहा है। सेंटर में वायरिंग बदलने के लिए जिला पंचायत ने हाल ही में 7 लाख रुपए का टेंडर भी जारी किया है। इस मामले में जिला पंचायत के अफसरों का तर्क है कि सेंटर में प्रोडक्ट का उत्पादन तो महिलाएं कर रही थी, लेकिन इसकी मार्केटिंग नहीं हो पा रही थी। प्राइवेट वेंडर्स इसे संचालित करेंगे। रोजाना 200 रु. का होता था भुगतान मल्टी यूटिलिटी सेंटर में करीब 200 स्व- सहायता समूह की महिलाएं काम कर रही थीं। यहां काम करने वाली महिलाओं को 25 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से मजदूरी का भुगतान किया जा रहा था। इस तरह हर महिला को औसतन 200 रुपए प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी। महिलाएं इस केंद्र में गोमूत्र, गोबर पाउडर, गोबर के अर्क, आलू विटामिन ई, कैमल मिल्क, गोट मिल्क और एलोवेरा से साबुन तैयार कर रही हैं। अफसरों का मानना है मार्केटिंग नहीं होने के चलते इन सामाग्री की बिक्री उम्मीद के अनुसार नहीं हो रही थी। ये प्रोडक्ट तैयार करती थीं महिलाएं इस सेंटर में ग्लिसरीन साबुन, डिजाइनर मोमबत्ती, बांस के ट्री गार्ड, अगरबत्ती, फिनाइल, फेस वास, मशरूम, मुनगा पाउडर से तैयार कुकीज, हर्बल टी, एलईडी बल्ब, स्लीपर, गोबर के गमले, हर्बल गुलाल, सब्जी के बीज जैसे प्रोडक्ट तैयार किए जाते थे। साथ ही इस सेंटर में एलईडी एसेंबलिंग यूनिट, हर्बल गुलाल, जूट बैग, पेपर बैग भी तैयार किए जा रहे थे। क्रेडा द्वारा कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, सोलर वाटर हीटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। महिलाओं को प्रशिक्षण के बाद चप्पल बनाने के लिए 10 मशीनें उपलब्ध कराई गईं। प्राइवेट वेंडर करेंगे काम, रोजगार भी देंगे
^ सेरी खेड़ी मल्टीयूटीलिटी सेंटर वेंडर को दिया जा रहा है। वेंडर्स के नियम में है कि महिलाओं को रोजगार देना है। इसके साथ ही जो योजनाएं बंद हो गई है, उसमें जिसका बाजार में डिमांड है उसको दोबारा शुरू किया जाएगा।
-कुमार विश्वरंजन, सीईओ जिला पंचायत रायपुर भास्कर लाइव|सेंटर में सब कुछ बंद दैनिक भास्कर की टीम सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर पहुंची। यहां मछली और मोती पालन के लिए 6 से अधिक टैंक बनाया गया है। टैंक में मछली और मोती दोनों नजर नहीं आई। इसके बाद टीम हस्तकला केंद्र पहुंची। यहां पर 24 से अधिक चारपाई लगी थी। पूछने पर कर्मचारी ने बताया कि यहां ट्रेनिंग सेंटर संचालित होता है। प्रदेशभर से लोग आते हैं। रात यहीं रुकते हैं। थोड़ी देर बाद टीम एक यूनिट में पहुंची, जहां चप्पल बनाया जाता था, लेकिन वहां सिर्फ चप्पल स्टैंड लगा था। यहां ना तो चप्पलें थी और ना ही काम करने वाली महिलाएं। टीम मशरूम सेंटर पहुंची तो अंदर पानी भरा था। कर्मचारी ने बताया कि मशरूम बारिश में नहीं होता। टीम इनवेंटरी आउट वार्ड पहुंची। यहां पर आलू चिप्स, पटैटो ड्रायर, पटैटो पिलर और पटैटो स्लाइसर की मशीन तो लगी है, लेकिन काम नहीं हो रहा है। पिछले तीन साल से सिलाई मशीन पैक करके कबाड़ में रख दी गई है। वहां रागी, कोदो और कुटकी की छंटाई के लिए मशीन लगी है। सभी मशीनें बंद हैं। ठीक इसी तरह मसाला पैक करने वाली मशीन और पिलो पाउच मशीन भी बंद है।


