रामानुजगंज की दिव्यांग रूपा दास की प्रेरक कहानी:ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा करती, मंगलसूत्र भी बनाती; आत्मनिर्भर बनने की कर रही कोशिश

बलरामपुर जिले में रामानुजगंज के वार्ड नंबर 8 में रहने वाली रूपा दास (24 साल) शारीरिक रूप से पूर्णतः दिव्यांग हैं। उनके हाथ-पैर पूरी तरह कार्य नहीं करते और वह ठीक से बैठ भी नहीं सकतीं। इन चुनौतियों के बावजूद रूपा ने अपनी 12वीं की पढ़ाई रामानुजगंज के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की है। वर्तमान में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के साथ मंगलसूत्र गुथने का काम भी करती हैं। स्वरोजगार की विशेष योजनाएं बनानी चाहिए – रूपा शनिवार (13 सितंबर) को जितिया बाजार में रूपा अपनी मां गीता देवी के साथ पूरी लगन से काम करती नजर आईं। उनके पिता प्रवेश दास का पहले ही निधन हो चुका है। रूपा का कहना है कि वह लेखन या पठन-पाठन से जुड़ा कोई भी काम पूरी निष्ठा से कर सकती हैं। उनका मानना है कि शासन-प्रशासन को दिव्यांग जनों के लिए स्वरोजगार की विशेष योजनाएं बनानी चाहिए। इससे वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे। रूपा की कहानी साबित करती है कि मजबूत हौसले के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। समाज को भी ऐसे लोगों को आगे बढ़ने का अवसर और सहयोग देना चाहिए।

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