उत्तरप्रदेश सरकार में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया। वहीं फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया गया। इसके बाद देशभर में सड़कों, चौराहों से लेकर मोहल्लों के नाम बदलने का सिलसिला शुरू हो गया। इंदौर भी नाम बदलने की इस दौड़ में पीछे नहीं रहा। इसी फेहरिस्त में एक दिन पहले भाजपा विधायक गोलू शुक्ला ने महापौर काे पत्र लिखकर अपनी विधानसभा में आने वाले पांच मोहल्लों-कॉलोनियों के नाम बदलने की मांग उठाई है। इससे पहले भी शहर में कई नाम बदले गए, लेकिन खास बात यह है कि बदले हुए नाम सिर्फ दस्तावेजों तक ही सीमित रहे। आम लोगों की जुबां पर आज भी पुराने नाम ही चल रहे हैं। इसका बड़ा कारण प्रशासन, निगम औपचारिकता निभाते हुए दस्तावेजों में तो नाम दर्ज कर देते हैं, लेकिन असल कोशिश नहीं करते। देखने में यह भी आता है कि पत्राचार में भी प्रचलित पते ही जारी हैं। अब प्रचार-प्रसार करेंगे, ताकि लोगों की आदत में आ जाए
^कुछ कॉलोनियों व इलाकों के नाम बदलने के प्रस्ताव आए हैं, उन्हें अगली एमआईसी में रखेंगे। कोशिश करेंगे कि ये सर्वसम्मति से पास हो। जहां तक पहले बदले हुए नामों के प्रचलन में नहीं आने की बात है तो अब ये कोशिश करेंगे कि इसका प्रचार-प्रसार भी ज्यादा हो, ताकि लोगों की आदत में ये नए नाम आ जाएं। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर 15 से ज्यादा स्थानों के नाम बदल चुके हैं, पर चलन में नहीं


