मुक्तसर जिले के गांव मधीर में गुरुद्वारा साहिब के प्रांगण में युवाओं ने पिछले एक साल से एक अनोखी सेवा शुरू की है। यहां हर सुबह 5 बजे से 7 बजे तक संगत को वीट ग्रास जूस (गेहूं के जूस) वितरित किया जाता है। इस सेवा का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करना और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देना है। यह जूस पूरी तरह से आर्गेनिक तरीके से तैयार किया जाता है। इसके लिए गेहूं के बीजों को पुरानी मिट्टी में बोया जाता है और लगभग 15 दिनों में यह घास तैयार हो जाती है। इसके बाद इसे काटकर जूस निकाला जाता है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक और पोषण से भरपूर होता है। इस संबंधी बातचीत करते हुए गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके नजदीकी गांव हुसनर में भी ऐसी ही सेवा की जाती थी, जिसे उन्होंने प्रेरित होकर पहले तो उनसे ट्रेनिंग ली और उसके बाद करीब 1 साल से गुरुद्वारा साहिब में उनकी ओर से यह सेवा शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि इस सेवा में उनके साथ हरजीत सिंह, जगदीप सिंह, करना सिंह, दविंदर सिंह, करना सिंह, अमना सिंह, जतिंदर सिंह, अमृतपाल सिंह, कुलदीप सिंह, लखविंदर सिंह, हीरा सिंह सुबह 4 बजे आकर तैयारी शुरू करते देते हैं और 5 बजे तक जूस तैयार करके गुरुद्वारा साहिब में आने वाली संगत तो पिलाते हैं। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा साहिब में आसपास के गांव से करीब 350 के करीब संगत रोजाना ही वीट ग्रास का जूस पीने के लिए आती है। इस संबंधी बातचीत करते हुए गुरप्रीत सिंह ने बताया कि वीट ग्रास जूस बनाने में सेवा करने वाले नौजवानों में कोई खेतीबाड़ी कार्य करता है तो कोई प्राइवेट जॉब करता है। सभी नौजवान पहले सुबह 4 बजे गुरुद्वारा साहिब में आते हैं और कुंडे व नीम के घोटे से गेहूं के पत्तों को पीसना शुरू करते हैं और करीब 5 बजे तक इसका जूस बनाना शुरू हो जाता है और जैसे-जैसे संगत आती है रहती है उन्हें यह वीट ग्रास ज्यूस पिलाया जाता है। उन्होंने बताया कि यह सेवा सुबह 5 बजे से 7 बजे तक की जाती है। उन्होंने बताया यह वीट ग्रास जूस यह शरीर को डिटॉक्स करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन में सुधार करता है। सेवा हर साल 1 दिसंबर से 1 मार्च तक चलती है, और इन ठंड के महीनों में जूस का सेवन स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। उन्होंने बताया कि यह वीट ग्रास का जूस कैंसर, शुगर, गठिया वा के लोगों के लिए अति लाभदायक है। यह जूस पूरी तरह से आर्गेनिक तरीके से तैयार किया जाता है। इसके लिए गेहूं के बीजों को पुरानी मिट्टी में बोया जाता है और लगभग 15 दिनों में यह घास तैयार हो जाती है। इसके बाद इसे काटकर जूस निकाला जाता है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक और पोषण से भरपूर होता है।


