भास्कर न्यूज | मुक्तसर वर्ष की अंतिम एवं सबसे शक्तिशाली अमावस्या आज 30 दिसंबर (सोमवार) को है। ये अमावस्या सबसे शक्तिशाली इस लिए मानी गई है क्योंकि यह दिन पूर्वजों को समर्पित है। सोमवार को पड़ने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि आत्म शुद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। कहते हैं कि जो साधक अपने जीवन की तमाम समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं, उन्हें इस दिन ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना चाहिए। इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है। यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक प्रसिद्ध विद्वान ब्रह्मऋषि पं. पूरन चंद्र जोशी ने सोमवती अमावस्या पर प्रकाश डालते हुए दी। उन्होंने बताया कि पौष माह की अमावस्या तिथि 30 दिसम्बर को सुबह 04:01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, सोमवती अमावस्या की समाप्ति 30 दिसम्बर को देर रात 31 की सुबह 03:56 मिनट पर होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि का महत्व है। इसलिए 30 दिसम्बर सोमवार को ही सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। सोमवती अमावस्या का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन अपने पूर्वजों का एक जानकार पंडित जी के माध्यम से तर्पण कराना चाहिए। इससे जीवन में खुशहाली आती है और कुंडली से पितृ दोष समाप्त होता है। पं. जोशी के अनुसार यह अमावस्या पूर्वजों का पिंडदान करने का सबसे सही दिन है। ऐसे में जिन्हें अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि न पता हो, तो वे इस दिन अपने पितरों का पिंडदान कर सकते हैं। इस दिन ज्यादा से ज्यादा दान और पुण्य करें। कहा जाता है कि इस दिन भोजन, कपड़े और अन्न एवं आवश्यकता की चीजों का दान करने से भाग्य प्रबल होता है। साथ ही पितृ प्रसन्न होकर मनचाहा फल देते हैं। सोमवती अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा गया है। चूंकि, सोमवती अमावस्या भगवान शिव को समर्पित है इसलिए इस दिन भगवान शिव की उपासना की जाती है. इस बार सोमवती अमावस्या पर कई दुर्लभ संयोग बनने जा रहे हैं। इसलिए इस बार की अमावस्या बेहद खास मानी जा रही है। इस साल सोमवती अमावस्या पर ध्रुव योग, धृति योग, स्वाति नक्षत्र और शिववास का खास संयोग बन रहा है. ऐसे में इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या कुछ राशियों के लिए शुभ है।


