पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे से ग्रामीण सड़क की बिगड़ी सूरत

भास्कर न्यूज|कोडरमा कोडरमा थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत वार्ड संख्या-08 निवासी अशोक यादव ने अंचलाधिकारी कोडरमा को एक आवेदन सौंपकर गलत घोषणा पत्र देकर उनकी वंशावली में अपना नाम जोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार उनकी पारिवारिक वंशावली का गलत उपयोग कर लाभ उठाने का प्रयास किया जा रहा है। यादव ने अपने आवेदन में कहा है कि सुंदरनगर निवासी अवधेश कुमार, पिता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने गलत घोषणा पत्र देकर उनकी वंशावली में अपना नाम जोड़ लिया है। इसके आधार पर उन्होंने प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है। अशोक यादव ने स्पष्ट किया कि उनका अवधेश कुमार से किसी भी प्रकार का खून का रिश्ता या पारिवारिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद, फर्जी दस्तावेज बनाकर उनके परिवार की वंशावली से नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो पूर्णत: गलत है। उन्होंने अंचलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके और कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से सरकारी योजनाओं या लाभ का फायदा न उठा सके। आवेदन की प्रतिलिपि उपायुक्त और एसडीएम कोडरमा को भी सौंपी गई है। अब देखना होगा कि जांच पूरी होने के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होती है। भास्कर न्यूज| गिद्धौर नल जल योजना के तहत प्रखंड के गांगपुर में पाइप लाइन बिछाए जाने से गांव के ग्रामीण पथ की सूरत बिगड़ गई है।गांव में पहले मेन पाइप लाइन बिछाया जाना था। परंतु संवेदक द्वारा आधे गांव में मेन पाइप बिछाने के बाद मुहल्ले में पाइप डालने का काम शुरू कर दिया।इसी क्रम में जोरदार बारिश हुई।पाइप डालने के क्रम में खोदे गए गड्ढे की मिट्टी से गांव के ग्रामीण पथ की सूरत बिगड़ गई।सड़क किनारे जहां तहां गड्ढे हो गए साथ ही सड़क पर मिट्टी होने से लोगो को आने जाने में काफी परेशानी हो रही है।पूरा सड़क कीचड़ में तब्दील हो गया है।मुहल्ले में पाइप लाइन बिछाने के लिए गड्ढा खोदे जाने से पूर्व कई ग्रामीण काम करने वाले मुंशी तथा मजदूर को पहले मेन पाइप लाइन बिछाने के बाद मुहल्ले का काम शुरू करने की बात कही।परंतु मुंशी अपने जिद पर मुहल्ले में पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया।इस दौरान खोदे गए गड्ढे व मिट्टी से जहां एक ओर सड़क की सूरत बिगाड़ दिया है। वहीं दूसरी तरफ लोगो को हल्की बारिश में भी आने जाने में परेशानी हो रही है। मामले को मैनेज करने का किया जा रहा है प्रयास इधर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रबंधन की ओर से पूरे मामले को मैनेज करने का प्रयास जोर-शोर से किया जा रहा है। एसडीएम द्वारा एक बार फिर छात्रों का पक्ष जानने के लिए उन्हें सोमवार को बुलाया गया है। इसके पहले कॉलेज प्रशासन की ओर से विरोध कर रहे छात्रों को भी मानने का प्रयास जारी है। इसके अलावा पूरे मामले में लीपापोती को लेकर प्रबंधन की ओर से अनय प्रकार के भी दावा खेले जा रहे हैं। पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से छात्रों को ही गलत ठहरने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही इसी आधार पर बचने के भी प्रयास किया जा रहे हैं। इधर कॉलेज प्रशासन की ओर से एसडीएम से कई बिंदुओं पर मांगे गए जवाब के आलोक में कुछ बिंदुओं पर दिए गए जवाब में छात्रों पर निर्धारित समय में निबंधन एवं परीक्षा फॉर्म नहीं भरे जाने को लेकर कई छात्रों ने इसका खंडन किया है । साथ ही पूरे मामले की कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे से जांच की मांग की है। इस मामले में नालंदा बिहार के रहने वाले अशोक चौधरी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के लिए कॉलेज प्रबंधन की ओर से 5500 रुपए अलग से लिए गए थे। उसने बताया कि रजिस्ट्रेशन फॉर्म का रिसिप्ट किसी भी छात्र को नहीं दिया गया। उसने कहा कि इसकी जांच कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे से हो सकती है। उससे फीस के रूप में पूरी राशि 130000 रुपया ले ली गई। वही बिहार के अररिया की रहने वाली प्रिया कुमारी ने बताया कि उन्हें पहले कॉलेज की ओर से बताया गया कि उनका फॉर्म रिजेक्ट हो गया है। कुछ डॉक्यूमेंट आकर जमा करें ।इसके बाद उसने डॉक्यूमेंट जमा किया। वहीं बिहार के दरभंगा के छात्र दीपक कुमार ने बताया कि उसे भी रजिस्ट्रेशन के नाम पर अलग से 5500 लिए गए।साथ ही इसका रसीद नहीं दिया गया। उसने भी इसकी जांच कॉलेज में लगे सीसीटीवी कैमरे से करने की बात कही है। उसने कहा कि फॉर्म और रजिस्ट्रेशन के दौरान उनसे सीएसी और माइग्रेशन का ओरिजिनल प्रमाण पत्र भी ले लिया गया। वही छात्र नगमा नाज ने भी बताया कि उसने रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा है। इसके अलावा नालंदा के रहने वाले शंकर ने बताया कि उसने रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा था। कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीनिवास ने कहा था कि वह 5 या 6 सितंबर को आकर कॉलेज से एडमिट कार्ड ले ले। लेकिन जब वह 8तारीख को एडमिट कार्ड लेने के लिए पहुंचा तो उसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया। उसने बताया कि उसका रजिस्ट्रेशन कैंब्रिज कॉलेज के बजाय रांची के किसी कॉलेज से कराया गया था। वहीं कॉलेज में जिन छात्र का रौल नंबर 3व 4 था। उसे भी एडमिट कार्ड नही दिया गया। भास्कर न्यूज |झुमरीतिलैया थाना क्षेत्र अंतर्गत नरेश नगर में रविवार सुबह दो ठगों ने बर्तन साफ करने के बहाने महिला को झांसा देकर लाखों के जेवरात उड़ा लिए। जानकारी अनुसार दोनों ठग खुद को एक कंपनी के प्रोडक्ट का प्रचारक बताते हुए घर में दाखिल हुए और बर्तन साफ कर दिखाने के दौरान घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। मामले में गृहस्वामी सत्यजीत कुमार उर्फ गोलू की मां ने बताया कि एक अज्ञात युवक उनके घर पहुंचा और पहले बर्तन साफ करके दिखाया। इसके बाद उसने जेवरात भी साफ करने की बात कही। महिला उसके झांसे में आ गई और कान के सोने के टॉप्स उतारकर दिए। इस बीच बहू ने भी सोने की चेन, शादी में चढ़ाया गया ढोलना और कानों के झुमके देकर बर्तन में डाल दिए। इसी दौरान ठग का दूसरा साथी बिना नंबर प्लेट की बाइक लेकर मौके पर आ गया। दोनों ने बड़ी चालाकी से महिला और उसकी बहू के हाथों में केमिकल लगा दिया और कहा कि इसे धोकर आएं। जैसे ही महिलाएं अंदर गईं, दोनों ठग जेवर लेकर भाग निकले। ज्ञात हो कि इसके पूर्व विशुनपुर रोड में भी ठगों ने इसी तरह महिला के जेवर लेकर फरार हो गए थें। घटना के बाद मौके पर पहुँची पुलिस मामले की जांच में जूटी है। ठगों की तस्वीर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में दर्ज हो गई है। फुटेज में दोनों ठगों के घर में घुसने और बाहर निकलने की तस्वीरें मिली हैं। इन्हीं आधारों पर पुलिस आगे की जांच कर रही है। शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे और खोजबीन की,लेकिन तबतक ठग फरार हो चुके थे। भास्कर न्यूज | कोडरमा जिले में संचालित कैंब्रिज टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में डीएलएड में निर्धारित सीट से अधिक नामांकन कराने व छात्रों को फाइनल परीक्षा से वंचित करने एवं उनके साथ फीस के रूप में राशि की धोखा घड़ी करने के मामले में कॉलेज प्रबंधन की ओर से शनिवार की देर शाम एसडीएम के समक्ष अपना जवाब दिया गया है। हालांकि एसडीएम द्वारा मांगे गए कई बिंदुओं पर प्रबंधक की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। वहीं कुछ बिंदुओं पर प्रबंधन की ओर से दिए गए जवाब में पूरा कॉलेज प्रशासन कटघरे में फंसता दिख रहा है । एक ओर जहां छात्रों के विरोध के बाद एसडीएम की ओर से वार्ता के लिए बुलाए जाने पर कॉलेज के प्राचार्य की ओर से वैसे सभी छात्र जिनको एडमिट कार्ड नहीं इशू किया गया था। उनको अपने कॉलेज का छात्र मानने से ही इनकार कर दिया गया था। वहीं दूसरी ओर कॉलेज के सचिव शिव शंकर यादव की ओर से 13 सितंबर को लिखित में दिए गए जवाब में सभी छात्रों को अपने कॉलेज का छात्र बताया गया है। वहीं सचिव की ओर से दाखिल किए गए जवाब में कहा गया है कि जिन छात्रों को फाइनल परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड ईशु नहीं किया गया वे सभी छात्र निर्धारित अवधि के दौरान परीक्षा में शामिल होने को लेकर पर्याप्त दस्तावेज कॉलेज में जमा नहीं किया । वहीं उसने कहा है कि कई छात्रों को कॉलेज प्रशासन की ओर से निबंधन फॉर्म एवं परीक्षा फॉर्म भरे जाने को लेकर कॉलेज बुलाया गया था। पर वे सभी छात्र कॉलेज में आकर निर्धारित प्रक्रिया को नहीं पूरा किया। जिसके कारण इन छात्रों का निबंधन नहीं होने के कारण परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस मामले में उसने कुछ छात्रों को भेजी गई नोटिस भी संलग्न किया है । वहीं कालेज प्रबंधन की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ छात्रों के द्वारा विलंब से डॉक्यूमेंट जमा किया गया। साथ ही परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया। जिसके कारण वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। गौरतलब हो कि कॉलेज में डीएलएड में निर्धारित सीट 50 है, जबकि 100 से अधिक बच्चों का नामांकन किया गया। एसडीएम द्वारा छात्रों के आरोपो को लेकर कॉलेज प्रशासन से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी । जिसमें डीएलएड की पढ़ाई करने वाले सभी छात्रों के नामांकन पंजी ,वहां के शिक्षकों की सूची कॉलेज में लगे सीसीटीवी का फुटेज, भरे गए रजिस्ट्रेशन फॉर्म की पंजी छात्रों से ली गई फीस की पंजी छात्रों के लिए गए इंटरनल एग्जाम से संबंधित कागजात के अलावे अन्य जानकारियां शामिल हैं। जानकारी के अनुसार कॉलेज पूरी तरह से निर्धारित नियमों की अवहेलना कर चलाया जा रहा है। कॉलेज प्रबंधन की ओर से फर्जी नामांकन कर पिछले कई सालों से कल्याण विभाग की ओर से छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की भी एक बड़ी राशि के रूप में घोटाला किया गया है। एसडीएम ने इस संबंध में भी जानकारी मांगी थी मगर इस मामले में भी कोई कागजात कॉलेज प्रबंधन की ओर से जमा नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार कालेज प्रशासन की ओर से एक ही कैंपस में डीएलएड ,बीएड सहित नर्सिंग कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। साथ ही इसके लिए अलग-अलग फैकल्टी भी बहाल नहीं किए गए हैं। कुल मिलाकर कई स्तर पर कॉलेज के संचालन में प्रबंधक की ओर से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। जिसकी सही से जांच होने पर शैक्षणिक संस्थान के नाम पर धोखा घड़ी एवं सरकारी राशी के बंदरबन के एक बड़े मामले का खुलासा हो सकता है।

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