लगातार कई साल से बाढ़ से प्रभावित चंबल में घड़ियालों की सर्वाइव दर प्रभावित हुई है। सामान्य स्थितियों में भी यह 2% है, यानी 98% घड़ियाल के बच्चे जन्म लेने के बाद परभक्षी और बाढ़ की भेंट चढ़ जाते हैं। इस साल चंबल नदी में बाढ़ आने से पहले ही बजरी में दबे 200 अंडों को निकाल कर देवरी सेंटर लाया गया। उनमें से 195 बच्चे सुरक्षित जन्म ले चुके हैं। यह बच्चे देवरी स्थित घड़ियाल हैचरी में पल बढ़ रहे हैं। बता दें कि 1975-77 में हुए सर्वेक्षण में चंबल में केवल 46 घड़ियाल बचे थे। संरक्षण प्रयासों के चलते अब इनकी संख्या सैकड़ों में है। हर साल कुनबा बढ़ता ही जा रहा है। घड़ियालों की शिशुशाला…यहां वीआईपी ट्रीटमेंट से परवरिश देवरी सेंटर में घड़ियालों के नवाजातों को जिस पूल में रखा गया है, उसका पानी हर दिन बदलता है। पानी में सेंसर लगे हुए हैं। डिजीटल थर्मामीटर हैं, जो तापमान को नियंत्रण करते हैं। वहीं, सेंटर में घड़ियाल के बच्चों के लिए मौसम के हिसाब से गर्मी में खस की टटिया लगाकर तो सर्दी में कैनवास के पर्दे लगाकर ब्लोवर हीटर की व्यवस्था की जाती है। घड़ियाल शिशुओं का हेल्थ चेकअप एक्सपर्ट करने आते हैं। घड़ियालों के बच्चों का उम्र अनुसार व्यवहार का पता, कमजोरी आदि का परीक्षण होकर रिपोर्ट तैयार की जाती है। अंडे से निकलने के बाद 15 दिन तक बच्चों को क्वारंटीन रखते हैं… देवरी हैचरी के घड़ियाल विशेषज्ञ ज्योति डंडोतिया ने बताया कि नर्सरी में 2022 के 15, 2023 के 94, 2024 के 70 और 2025 के 195 शिशुओं की देखेरख हो रही है। अंडे से निकलने के 15 दिन तक क्वारंटीन रखते हैं। 1.2 मीटर लंबाई होने पर चंबल में छोड़ देते हैं।


