लापरवाही का मामला:500 नल कनेक्शन से व्यर्थ बह रहा पानी; लीकेज, गाड़ी-सड़क धोने में भी रोज 90 लाख लीटर की बर्बादी

इस साल हुई अच्छी बारिश से राजघाट बांध अभी भी लबालब है। अभी बांध का लेवल 514.09 मीटर है। यानी अपनी क्षमता से मात्र 91 सेंटीमीटर ही खाली हुआ है। बांध से नियमित जलापूर्ति भी शहर में हो रही है। इसके चलते लोग लापरवाह हो गए हैं। घरों की टंकियां भर जाने के बाद टोंटी बंद नहीं करते। राजघाट बांध की सप्लाई के पानी से ही सड़क और अपने वाहनों को धोने हजारों लीटर पानी व्यर्थ बहा देते हैं। इतना ही नहीं बांध में पर्याप्त पानी होने के चलते नगर निगम भी लापरवाह हो गया है। ऐसे नल कनेक्शन जिनसे रोज व्यर्थ पानी बह रहा है और लोग घरों में न होने के कारण उनका उपयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें बंद करने का काम नहीं किया जा रहा है। साथ ही व्यर्थ पानी बहाने वालों पर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही हाल रहा तो हर साल गर्मियों में जिस तरह का जलसंकट होता है और शहरवासी पीने के पानी के लिए पांच से ​छह दिन तक इंतजार करते हैं। वही हाल इस बार भी हो सकता है। अभी 2.5 सेमी रीत रहा बांध, दो माह बाद ही 3-4 सेमी प्रतिदिन रीतेगा राजघाट बांध अभी रोज 2.5 सेंटीमीटर रीत रहा है। जैसे-जैसे ठंड कमजोर पड़ेगी, पानी की खपत और बढ़ती जाएगी। दो माह बाद ही बांध 3 से 4 सेंटीमीटर तक प्रतिदिन रीतने लगेगा। इसके बाद बांध तेजी से खाली होगा और जलसंकट की स्थिति बनेगी। ऐसे कनेक्शन जिनको लोग बंद करना छोड़ गए या रोजाना पानी व्यर्थ बहता रहता है उनकी संख्या 500 के करीब है। जबकि छोटे बड़े लीकेज की संख्या भी 100 से 150 के बीच है। टंकियों में जलापूर्ति के समय सबसे ज्यादा पानी इन्हीं लीकेज से बर्बाद होता है। ऐसे में इन्हें सुधारना भी बेहद जरूरी है। अभियान चलाकर और नियमित मॉनिटरिंग कर ही ऐसा किया जा सकता है। शहर में रोज 6 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई, 15% व्यर्थ ही बह रहा शहर में भले ही घरों में एक दिन छोड़कर एक दिन लोगों को पानी मिलता हो लेकिन जल सप्लाई रोज की जाती है। एक हिस्से में एक दिन तो दूसरे हिस्से में दूसरे दिन जलापूर्ति की जाती है। राजघाट बांध से रोजाना 6 करोड़ लीटर की जलापूर्ति अकेले सागर नगर में की जाती है। इसमें से 15% यानी 90 लाख लीटर पानी व्यर्थ ही बह जाता है। इस हिसाब से देखा जाए तो माह भर में 27 करोड़ लीटर पानी बह जाता है। यदि इसे बहने से रोका जाए तो शहर में 5 दिन की जलापूर्ति का पानी एक माह में ही बचाया जा सकता है। यानी मई से होने वाले जलसंकट का पानी अभी से ही बचाकर रोका जा सकता है। जागरूकता एवं जुर्माना दोनों के अभियान चलाएंगे महापौर संगीता सुशील तिवारी ने कहा लोग पानी को व्यर्थ न बहाएं, जरूरत का पानी भरने के बाद टोंटी बंद कर दें, इसको लेकर जागरूकता अभियान चलाएंगे। इसके साथ ही ऐसे कनेक्शन जिनका उपयोग ही नहीं हो रहा और उनसे पानी व्यर्थ बहता रहता है, उन्हें बंद कराया जाएगा। जो बार-बार समझाने पर भी व्यर्थ पानी बहाना बंद नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध जुर्माना की कार्रवाई भी की जाएगी। लीकेज सुधार के लिए भी अमले को निर्देश दे रही हूं। लोग गर्मियों में जलसंकट से परेशान न हों, उसके लिए सभी जरूरी कदम अभी से उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नगर निगम के जल प्रदाय विभाग द्वारा रोजाना सूचना मिलने पर लीकेजों को सुधारने का काम किया जाता है। इसके साथ ही पानी की बर्बादी को रोकने के लिए समुचित उपाय पूरी ईमानदारी के साथ हों इसको लेकर नियमित मॉनीटरिंग होगी। जल्दी ही बैठक करूंगी।

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