वेतन के लिए बस अड्डा बंद, दो घंटे में सैलरी आई, तब यात्रियों को अंदर आने दिया गया

पनबस व पीआरटीसी कर्मचारियों ने अब तक अगस्त का वेतन न मिलने को लेकर बस अड्डे को बंद कर दिया। किसी भी बस को अड्डे के अंदर नहीं आने दिया गया और न ही बाहर जाने दिया। इससे बस स्टैंड पर आए लोग परेशान होने लगे। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को आई जो बस अड्डे से बाहर जाकर बस नहीं पकड़ सके। वे बस अड्डे पर ही इंतजार करते रहे। कर्मचारियों ने बैंक खातों में वेतन आने पर दो घंटे के बाद बस अड्डे को खोल दिया। इसके बाद ही बस अड्डे बसों का संचालन हो सका। बस अड्डा बंद होने के कारण लोगों को बस अड्डे से निकल कर सड़कों पर आकर बस पकड़ना पड़ा। लोग हड़ताल के खत्म होने का बस अड्डे पर ही इंतजार करते रहे। बस अड्डे पर पहुंची मनजीत कौर ने बताया कि उन्हें अमृतसर जाना था, लेकिन जब वह यहां पहुंची तो पता चला कि कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है। बसों को अंदर नहीं आने दे रहे हैं। बाहर जाकर बस पकड़ना मुश्किल बात है। अड्डे के बाहर से नहीं बस पकड़ने के लिए दूर जाना पड़ेगा। इसलिए यहीं वह इंतजार कर रही हूं। यूनियन के 280 कर्मचारियों ने काम ठप रखा कर्मचारियों ने बस अड्डे को बंद कर गेट रैली की व प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारे बाजी की। पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रवीण कुमार ने बताया कि 15 तारीख हो चुकी है और अब तक सरकार की ओर से कॉन्ट्रेक्ट वर्करों के वेतन जारी ही नहीं किया हैं। इसके लिए 12 बजे यूनियन की ओर से बस अड्डे का गेट बंद कर दिया गया और किसी भी सरकारी या प्राइवेट बसों को अंदर नहीं आने दिया गया। उनकी ये हड़ताल दो घंटे के लिए थी। यूनियन के 280 कर्मचारियों ने इस दौरान काम को ठप रखा। काम बंद करने के बाद प्रबंधन सक्रिय हुआ और उनके खातों में वेतन आ गया। इसके बाद सभी लोग काम में जुट गए। शेरपुर चौक व जालंधर बाईपास से पकड़ी बसें: बस अड्डे पर गेट बंद होने से बसों की आवाजाही रुक गई। जिन लोगों को बसों से जाना था वे अपना सामान लेकर मेन रोड पर निकल पड़े। जो लोग परिवार के साथ थे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। बस अड्डे से उन्हें शेरपुर चौक व जालंधर बाइपास चौक पर जाना पड़ा। बस अड्डा बंद होने के कारण यहां इक्का-दुक्का बसें ही आई।

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