अमृतसर | छेहर्टा नारायणगढ़ स्थित पंचरत्न श्री कृष्णा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा को सुनने कई भक्त पहुंचे। ब्यास गद्दी पर पंडित परशुराम विराजमान हुए। कथा दौरान महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का राजकुमारी रुक्मणी जी के साथ काफी बाधाओं के बाद विवाह हुआ । उन्होंने बताया कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण के पराक्रम और वीरता की कहानी सुनकर उनसे प्रेम करने लगी थी। रानी रुक्मणी ने अपनी सखी के हाथ भगवान श्री कृष्ण को संदेश भेजा। जिसमें उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के से विवाह की इच्छा जताई थी। संदेश मिलने के बाद भगवान श्री कृष्ण विदर्भ पहुंचे और बलपूर्वक रुक्मणी को वहां से उठाकर ले गए। उसके बाद रुक्मणी का भाई रुकमी अपनी सेना के साथ कृष्ण का पीछा करने लगा और दोनों में भीषण युद्ध हुआ। जिसमें श्री कृष्ण ने विजय प्राप्त की और द्वारिका आकर रुक्मणी से विवाह किया। उन्होंने बलराम और रेवती के विवाह का वर्णन बड़ी बखूबी से किया। उन्होंने कहा कि जरासंध ने 17 बार मथुरा पर आक्रमण किया लेकिन हर बार श्री कृष्ण ने उसकी सेना को परास्त किया और हर बार जरासंध को जीवित छोड़ा। अंत में श्री कृष्ण ने भीम और अर्जुन के साथ मिलकर ब्राह्मणों का वेश धारण किया और जरासंध को मल्ल युद्ध के लिए चुनौती दी। युद्ध के 14वें दिन श्री कृष्ण के इशारे पर भीम ने जरासंध के शरीर के दो टुकड़े किए और दोनों टुकड़ों को विपरीत दिशा में फेंक दिया।


