हमारी सारी मेहनत पानी में बह गई…:मीडिया को सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी

हरपिंदर सिंह। गांव में दौरे के दौरान राहुल गांधी की निजी मीडिया टीम ही कवरेज करती रही। स्थानीय मीडिया को उनसे सीधे सवाल पूछने या बाइट लेने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, इससे ग्रामीणों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। उनका कहना था कि उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि राहुल गांधी ने खुद उनके घर आकर हालात का जायजा लिया। ग्रामीणों ने राहुल गांधी से गुहार लगाई कि उनके लिए न केवल तत्काल राहत की व्यवस्था की जाए, बल्कि रावी नदी पर स्थायी तटबंध का निर्माण भी किया जाए। उनका कहना था कि जब तक नदी किनारे मजबूत बांध नहीं बनेगा, तब तक हर साल बाढ़ का खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने नए मकानों के निर्माण, रोजगार के अवसर, राहत सामग्री और घरेलू सामान उपलब्ध कराने की भी मांग की। दौरे में कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सांसद गुरजीत सिंह औजला, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पार्टी के अन्य नेता शामिल थे। उन्होंने कहा कांग्रेस साथ खड़ी है और इस आपदा की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाया जाएगा। माछीवाल गांव के बलबीर सिंह और हरपिंदर सिंह के घरों और खेतों में लगे ट्यूबवेल भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए। दोनों ने राहुल गांधी से कहा कि उनकी सारी मेहनत पानी में बह गई है। खेतों में खड़ी फसल भी नष्ट हो चुकी है। इस पर राहुल गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी आवाज़ संसद तक ज़रूर पहुंचेगी और उनकी समस्याओं को लेकर संसद में सवाल उठाए जाएंगे। इसके बाद राहुल गांधी माछीवाल गांव पहुंचे। वहां उन्होंने जसपाल चंद के घर का निरीक्षण किया। बाढ़ के पानी ने घर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें डाल दी थीं। राहुल गांधी ने उन्हें ढांढस बंधा या और भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर संभव मदद के लिए उनके साथ खड़ी है। भास्कर न्यूज| अमृतसर पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने जहां हजारों परिवारों की जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है, वहीं अब मदद की उम्मीदें भी धीरे-धीरे जीवित हो रही हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के सोमवार को किए गए दौरे ने बाढ़ प्रभावित गांवों के निवासियों को नई आस दी है। राहुल गांधी ने घोनेवाल और माछीवाल गांव के निवासियों में एक नई उम्मीद जगा दी है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पहली बार लगा कि उनकी आवाज किसी बड़े नेता तक पहुंची है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर राहुल गांधी मदद नहीं करना चाहते, तो वह हमारे टूटे घरों और तबाह हुए खेतों तक क्यों आते? राहुल सबसे पहले रमदास क्षेत्र के घोनेवाल गांव पहुंचे। वहां उन्होंने 70 वर्षीय फैज मसीह के घर का दौरा किया। फैज मूल रूप से मुस्लिम धर्म से थे, लेकिन अब ईसाई धर्म का पालन करते हैं। वह अपनी पत्नी सकीना बेगम (65) गृहिणी और दो बेटों मोहम्मद अब्दुल (25) तथा मोहम्मद सलीम (23) के साथ रहते हैं। फैज मसीह ने बताया कि उनका गांव में एक साइकिल रिपेयर का छोटा सा कारोबार था। दुकान के पीछे उनके 2 कमरे बने हुए थे और साथ ही वह कुछ नए कमरे भी बना रहे थे। लेकिन बाढ़ ने उनकी दुकान को पूरी तरह बहा दिया। नई इमारत, जिसकी नींव अभी कुछ ही महीने पहले रखी गई थी, बाढ़ के तेज़ पानी से हिल गई और अब गिरने की कगार पर है। इसके बाद राहुल रविदास सिंह के घर पहुंचे। करीब 10 मिनट तक बातचीत की । रविदास ने बताया कि बाढ़ के दिनों में उनके घर में चार फीट तक पानी भर गया था। मजबूर होकर पूरा परिवार छत पर चला गया और बरसात के बीच तिरपाल लगाकर कई दिनों तक वहीं डेरा जमाए रखा। राहुल जब रविदास के घर में थे इस दौरान उसका 6 वर्षीय बेटा अमृतपाल अपनी टूटी हुई साइकिल को देखकर रो रहा था। राहुल गांधी ने बच्चे को गोद में उठा लिया और उसे चुप कराया। उन्होंने अमृतपाल को नया साइकिल दिलाने का वादा किया।

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