बुजुर्ग बोले- उम्र ज्यादा और बैठने को ​दिक्कत , बस स्टैंड से बाहर जाना मुश्किल

भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब रोडवेज के कच्चे पनबस कर्मचारियों का वेतन एक महीने से न मिलने पर सोमवार दोपहर 12 से 2 घंटे तक बस स्टैंड पर हड़ताल रही। इस दौरान कर्मचारियों ने बस स्टैंड के दोनों प्रवेश द्वार जाम कर दिए, जिससे सरकारी और प्राइवेट बसें अंदर प्रवेश नहीं कर सकीं। बसों का आवागमन केवल स्टैंड के बाहर से हो सका, जिससे खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बुजुर्ग यात्रियों की दिक्कतें हड़ताल में सबसे ज्यादा नजर आईं। जहां बस स्टैंड जाम से कई युवा यात्री भी परेशान हुए, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं की असमर्थता, थकावट और चिंता साफ देखी जा सकती थी। 75 वर्षीय निरंजन सिंह निवासी डेरा बाबा नानक ने बताया कि वह आर्मी अस्पताल में इलाज करवाने आए थे, छड़ी के सहारे बड़ी मुश्किल से बस स्टैंड पहुंचा हूं। वापस जाना था पर बस स्टैंड पर हड़ताल हो गई है। बाहर भी नहीं जा सकता। उम्र ज्यादा है, खुद की देखभाल करना मुश्किल हो गया है। अब बस हड़ताल खुलने की ही उम्मीद है। 2 घंटे की इस हड़ताल ने केवल आवागमन बाधित नहीं किया, बल्कि उन लोगों की परेशानी को बढ़ा दिया जो अपनी उम्र और स्वास्थ्य के कारण लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते थे। इसके अलावा छोटे बच्चों और ज्यादा सामान होने के चलते यात्रियों को बस स्टैंड पर ही बसों का इंतजार करना पड़ा। 63 वर्षीय शिंदो कौर निवासी खासा की भी चिंता साफ झलक रही थी, उन्होंने बताया कि वह रोजाना काम के लिए अमृतसर आती है। आज घर पर सब मेरी चिंता कर रहे होंगे, समझ नहीं आ रहा उन्हें कैसे बताऊं, न मेरे पास फोन है न मेरे पास कोई घर का नंबर है। हड़ताल खुले तब ही वापस जा सकूंगी। 69 वर्षीय अमरजीत कौर निवासी खेमकरण ने आंख की दवा लेने के लिए हर हफ्ते आना-जाना होता है। उन्होंने बताया कि आज आंख की दवा के लिए जरूरी आना पड़ा। अब उसे 2 घंटे बस स्टैंड में बैठा रहना पड़ा। अगर हड़ताल नहीं खुली तो रात को रिश्तेदार के घर रुकना पड़ेगा। 67 साल की सतविंदर कौर निवासी अटारी अमृतसर में जरूरी सामान लेने आई थीं, उन्होंने बताया कि सामान तो ले लिया, पर भारी सामान लेकर बस स्टैंड के बाहर खड़े रहना मुमकिन नहीं। बस की हड़ताल खुलने का इंतजार कर रही हूं। बस स्टैंड पर बैठी 65 वर्षीय गुरमीत कौर निवासी टांडा ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ श्री दरबार साहिब से माथा टेककर लौट रही थी। 2 घंटे से बस स्टैंड में बैठी हूं, पर पता नहीं कब तक इंतजार करना पड़ेगा। उम्र ज्यादा है, बैठने की जगह भी नहीं है, और बसें बंद हैं।

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