स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताल पर बैठे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार कर्मचारियों को चेतावनी दी है। उनसे कहा है कि वे 16 सितंबर यानी मंगलवार तक काम पर लौट आएं। इसके बाद भी काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों को एक महीने की नोटिस देकर नौकरी से निकाला जाएगा। विभाग की ओर से इस संबंध में सभी जिलों के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को इस तिथि से वेतन का भुगतान भी नहीं किया जाएगा। दरअसल, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारी अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। इसके कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। कर्मचारी सरकार को खून से चिट्ठी भी लिख चुके हैं। हड़ताल के दौरान राज्य शासन ने कर्मचारियों की 10 में से पांच मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वे इस बात पर अड़े हुए हैं कि सभी 10 मांगें पूरी की जाएं, तभी काम पर लौटेंगे। ये काम हो रहे प्रभावित
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुल प्रजनन दर में कमी लाना, मलेरिया-टीबी की रोकथाम के लिए टीकाकरण करना तथा लोगों तक किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना शामिल है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। 25 को बर्खास्त किया तो सभी ने दिया इस्तीफा
हड़ताल से नहीं लौटने पर राज्य शासन ने एनएचएम कर्मचारी संगठन से जुड़े 25 पदाधिकारियों को बर्खास्त कर दिया था। इसका असर यह हुआ कि प्रदेश भर के एनएचएम कर्मचारियों ने अपना इस्तीफा जिलों के सीएमओ को सौंप दिया था।
ये प्रमुख मांगें सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा 12,000 कर्मचारी
इनमें सबसे ज्यादा एएनएम, स्टाफ नर्स, सीएचओ की संख्या की ज्यादा है। वहीं मैनेजमेंट श्रेणी के चार हजार से ज्यादा कर्मचारी पदस्थ हैं, जबकि शेष 12 हजार सर्विस सेक्टर में हैं। जिनके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का पूरा सिस्टम चल रहा है। लेकिन 18 अगस्त के बाद से ये काम पूरी तरह से प्रभावित है और डेटा एंट्री के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की डेली रिपोर्टिंग भी पूरी तरह से प्रभावित है। स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ 38 फीसदी कर्मचारी ही उपस्थिति दे रहे हैं, जबकि 60 फीसदी से ज्यादा संविदा कर्मचारी एनएचएम से जुड़े हुए हैं। बता दें कि हड़ताल 28वें दिन में पहुंच गई है। कर्मचारियों द्वारा मांगे पूरी नहीं होने से नाराज होकर इच्छा मृत्यु की मांग की जा रही है। भास्कर एक्सपर्ट – बीकेएस रे, पूर्व अपर मुख्य सचिव प्रशासनिक चेतावनी का असर होता है
हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के लिए यह एक कड़ी प्रशासनिक चेतावनी है। इस तरह की चेतावनी के बाद कई बार व्यवस्था में सुधार होता है, कई हड़ताली काम पर लौट जाते हैं लेकिन जो काम पर नहीं लौटते ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का जो प्रावधान है वह किया भी जाता है।


