आजकल फिटनेस सिर्फ एक्सरसाइज और हेल्थ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को आपस में जोड़ने का नया जरिया भी बन रही है। शहर की सड़कों और पार्कों में सुबह-सुबह जब लोग ग्रुप बनाकर साइक्लिंग करते हैं, मॉर्निंग वॉक के दौरान बातचीत करते हैं या योग के बाद बातचीत, तो यह नजारा सिर्फ सेहत सुधारने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने और नए दोस्त बनाने का माध्यम बन जाता है। फिटनेस क्लब, रनिंग ग्रुप और साइक्लिंग टीम्स अब नेटवर्किंग का भी प्लेटफॉर्म बन गए हैं, जहां समान सोच और रुचियों वाले लोग आपस में जुड़ रहे हैं। बदलते लाइफस्टाइल में जहां काम का तनाव और व्यस्तता लोगों को दूर कर रही थी, वहीं फिटनेस ने एक नया रास्ता दिखाया है जहां पसीना बहाने के साथ-साथ हंसी-मजाक, बातचीत और दोस्ती भी शामिल है। सेहत के साथ मानसिक सुकून भी 45 साल की साधना द्विवेदी लंबे समय से अपनी सेहत को लेकर काफी सजग रहती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने साइक्लिंग क्लब जॉइन किया हुआ है, जहां रोजाना सुबह वह ग्रुप के साथ साइक्लिंग करती हैं। इससे उनकी फिटनेस में सुधार हुआ है और घर की व्यस्त दिनचर्या से मिलने वाला तनाव भी काफी हद तक कम हुआ है। इस क्लब ने उन्हें न सिर्फ नए दोस्त दिए, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों के साथ नेटवर्किंग का भी अवसर दिया है। साइक्लिंग अब उनके लिए केवल एक्सरसाइज नहीं रही, बल्कि दोस्ती, मोटिवेशन और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है। उनका कहना है कि साइक्लिंग ग्रुप जॉइन करने के बाद सेहत के साथ-साथ मानसिक सुकून भी मिलता है। सामुदायिक जुड़ाव गहरे होने लगे 60 साल के चमकौर सिंह रिटायर्ड जीवन जी रहे हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। उनका एक ग्रुप है, जिसमें सभी लोग हर रोज पार्क में मिलते हैं और एक साथ योग करते हैं। इस दौरान न केवल शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दिया जाता है, बल्कि मानसिक सुकून और आपसी जुड़ाव भी बढ़ता है। ग्रुप के सदस्य अपने-अपने जीवन के अनुभव एक-दूसरे से साझा करते हैं। खास बात यह है कि जो लोग अभी वर्किंग हैं, उन्हें यह वरिष्ठ सदस्य अपने अनुभवों के आधार पर काम और जीवन से जुड़ी सलाह भी देते हैं। इस तरह पार्क में बना यह योग ग्रुप न सिर्फ स्वास्थ्य को बेहतर बना रहा है, बल्कि रिश्तों और सामुदायिक जुड़ाव को भी मजबूत कर रहा है। दोस्ती से सोशल कनेक्शन मजबूत रेनू सभरवाल ने बताया कि एक फिटनेस ग्रुप बनाया हुआ है, जो केवल वर्कआउट तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी जुड़ाव और सपोर्ट का जरिया भी बन चुका है। इस ग्रुप में हर उम्र और हर पेशे की महिलाएं शामिल हैं। कोई हाउसवाइफ है तो कोई फ्रीलांसर। हर तरह के फिटनेस वर्कआउट किए जाते हैं, जिससे न केवल सेहत बेहतर हो रही है, बल्कि एक-दूसरे को प्रेरित करने का अवसर भी मिल रहा है। खास बात यह है कि इस ग्रुप में सभी दोस्त की तरह जुड़ी हुई हैं। फिटनेस के बहाने यह महिलाएं रोज़ाना एक-दूसरे से मिलती हैं। अपनी परेशानियां और खुशियां साझा करती हैं और जीवन को सकारात्मक दिशा देने में सहयोग करती हैं। वर्कआउट सत्रों के दौरान उन्हें मानसिक सुकून भी मिलता है।


