बयान पर बवाल:ताला जड़ा-बिजली काटी, आधी रात हुई सुलह- कुलगुरु दोबारा विवि में नहीं आएंगी

सुविवि में लगातार तीसरे दिन मंगलवार को भी बवाल मचा रहा। कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा की ओर से क्रूर औरंगजेब को कुशल प्रशासक बताने के मुद्दे पर छात्रों का सुबह से लेकर आधी रात तक हंगामा जारी रहा। छात्रों ने कुलगुरु के ऑफिस की बिजली और सीसीटीवी के कनेक्शन भी काट दिए। विवाद बढ़ता देख पुलिस और प्रशासन ने छात्र नेताओं से वार्ता कर समझाइश की। लेकिन छात्र अड़े रहे। रात करीब 11 बजे इस शर्त पर सहमति बनी कि कुलगुरु प्रो. मिश्रा मामला शांत होने तक विवि परिसर में कदम नहीं रखेंगी। इसके बाद रात 11:18 बजे कुलगुरु को भारी पुलिस जाब्ते के बीच दफ्तर से निकालकर आवास पर पहुंचाया गया। इससे पहले सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक एबीवीपी-एनएसयूआई समर्थित छात्रों ने सुविवि के सभी कॉलेजों और विभागों के बाहर प्रदर्शन किया। प्रशासनिक भवन, लॉ, आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, इंजीनियरिंग और होटल मैनेजमेंट विभाग में कामकाज ठप रहा। दोपहर 2:30 बजे तक माहौल शांत हो गया। इसके बाद छात्र नेता भी लौट गए। लेकिन, शाम 5:20 बजे कुलगुरु मिश्रा जैसे ही दफ्तर पहुंचीं, हालात फिर बिगड़ गए। सूचना मिलते ही सभी छात्र नेता फिर से एकत्र हुए और प्रशासनिक भवन के चैनल गेट पर ताला जड़ दिया। कुलगुरु की कार को पार्किंग में चारों ओर कारें लगाकर घेर लिया। इस बीच छात्र और भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन में घुस गए। शाम 6:30 से 7:30 बजे के बीच पुलिस और छात्रों के बीच जोरदार धक्का-मुक्की हुई। इसमें कई पुलिसकर्मी, छात्र और कार्यकर्ताओं को चोटें भी लगी। भारी पुलिस जाब्ता मौजूद था, लेकिन हालात काबू में नहीं आ सके। एबीवीपी समर्थित छात्रनेता रौनकराज सिंह, मिलिंद पालीवाल ने समर्थकों के साथ कुलगुरु के दफ्तर के चैनल गेट पर ताला जड़ दिया। इकसे बाद सोफा लगाकर रास्ते को ब्लॉक कर दिया। एएसपी सिटी उमेश ओझा और एडीएम दीपेंद्र सिंह तीन घंटे तक समझाइश करते रहे, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं हुआ। कुलगुरु कक्ष को यूं घेरा। कुलगुरु प्रो. सुनीता मामला शांत होने तक विवि नहीं आएंगी तो क्या वे अवकाश? बता दें, हाल ही जोधपुर के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने इस्तीफा दिया, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। कुलगुरुओं को पद से हटाने या हटने के तीन तरीके अपनाएं जाते हैं। पहला- इस्तीफा लेना, दूसरा- लंबे अवकाश पर भेजना, तीसरा- जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट का हवाला देकर पद से हटाना। सियासत यही है… भाजपा-कांग्रेस, एबीवीपी-एनएसयूआई सब लामबंद कुलगुरु के घेराव में छात्र संगठनों के साथ नेताओं की भी भीड़ जुटी। सुविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वज सिंह चौहान, भाजपा शहर जिला महामंत्री पंकज बोराणा, निखिलराज सिंह, नीरज समार मौजूद रहे। कांग्रेस से गौरव प्रताप सिंह, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह, प्रदेश सचिव सिद्धार्थ सोनी, महासचिव रोहित पालीवाल, महिपाल सिंह, लव चौधरी, यशवंत चौधरी, ध्रुव श्रीमाली और गजेंद्र सिंह राणा भी सक्रिय रहे। रजिस्ट्रार की रिपोर्ट- कुलगुरु की कार्यशैली और आचरण विवादित रजिस्ट्रार डॉ. गर्ग की ओर से पूरे विवाद की रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को भेजी गई है। इसमें कुलगुरु प्रो. सुनीता की ओर से मुस्लिम आक्रांताओं की तारीफ और 8 छात्र नेताओं के निष्कासन को विवाद की वजह बताया गया है। रिपोर्ट में कुलगुरु की कार्यशैली और आचरण को भी विवादित बताया गया है। दुर्व्यवहार की भी शिकायतें हैं। प्रो. एमएस ढाका की फर्जी भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ढाका को सभी प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर पुलिस कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, सीएमओ के निर्देश पर कलेक्टर नमित मेहता ने मंगलवार को रजिस्ट्रार गर्ग को बुलाकर पूरा मामला सुना। बुधवार विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को भेजेंगे। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने औरंगजेब को कुशल शासक बताने पर स्पष्टीकरण मांगा है। छात्रों की तैयारी… एबीवीपी-एनएसयूआई आंदोलन को बड़ा करने की तैयारी में हैं। नेताओं ने कई समाज-संगठनों से संपर्क शुरू करना शुरू दिया है। मेवाड़ की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए उदयपुर बंद की रणनीति भी बनाई जा रही है।

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