महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) में टेंडर प्रक्रिया पर एक और सवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि हाल ही में गठित टेंडर कमेटी में ऐसे व्यक्ति को जगह दे दी गई, जो विवि का कर्मचारी ही नहीं है। दरअसल, 28 अगस्त को प्रसार शिक्षा निदेशक की ओर से संविदा पर नियुक्तियों के लिए 3.33 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हुआ। इसमें वित्त नियंत्रक दर्शना गुप्ता ने महावीर कुमार पटवारी को अपना नॉमिनी बनाकर कमेटी में शामिल कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी न तो विवि के स्थायी कर्मचारी हैं और न ही राज्य सरकार के प्रतिनिधि। सवाल यही उठ रहा है कि उन्हें किस नियम के तहत नॉमिनी बनाया गया। सहायक कुल सचिव एसके खंडेलवाल ने साफ कहा कि रजिस्ट्रार कार्यालय में महावीर पटवारी नाम का कोई कर्मचारी ही नहीं है। टेंडर में कंट्रोलर का अलग रोल होता है, लेकिन इस नाम के किसी व्यक्ति की जानकारी नहीं है। ये है हकीकत : गैर कर्मचारी खुद मान रहा अभी तक यूनिवर्सिटी में नियुक्ति नहीं हुई इस टेंडर को निदेशक डॉ. आरएल सोनी ने अप्रूव किया और कमेटी में डॉ. राजीव बैराठी, डॉ. बीएल साल्वी, डॉ. केडी आमेटा, डॉ. बीजी छीपा, देवराज, कैलाश माली और महावीर कुमार पटवारी को सदस्य बनाया गया। पटवारी भी मानते हैं कि यूनिवर्सिटी में उनकी नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई को कंट्रोलर मैडम ने मुझे असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया था। फाइल वीसी और रजिस्ट्रार के पास भेजी है। इसके बाद राज्य सरकार के पास जाएगी। सरकार की अनुमति अभी नहीं मिली है। सरकार से अनुमति जरूरी ट्रेजरी अफसर कोषाधिकारी लोकेश यादव का कहना है कि विवि में कंट्रोलर नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार से अनुमति जरूरी होती है। यहां बिना अनुमति पटवारी को नियुक्त कर काम कराया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। कंट्रोलर और कुलपति एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी “विवि में कोई भी नियुक्ति वीसी के माध्यम से होती है। पटवारी सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उन्होंने सभी डॉक्यूमेंट दे रखे हैं।”
-दर्शना गुप्ता, कंट्रोलर “मेरे कार्यालय से पटवारी की नियुक्ति नहीं हुई। अगर कंट्रोलर ने की है तो उन्होंने सरकार से अनुमति ली होगी।”
-डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक, वीसी


