नागौर के जोधियासी गांव में महापुरूषों की मूर्तियां लगाने को दो पक्ष आमने-सामने हैं। प्रशासन मूर्ति लगाने को लेकर दोनों पक्षों में समझौता करवाने की कोशिश में है। आज इस मामले को लेकर जोधियासी के एक पक्ष के लोगों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मूर्तियां ना लगाने की मांग की है। विवाद गांव के चौक में प्रस्तावित महाराजा सूरजमल की मूर्ति से शुरू हुआ है। सरपंच के विरोधी गुट ने नागौर एसडीएम की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। गांव के एक गुट का कहना है कि गांव की सरकारी भूमि का मूर्तियों के नाम पर दुरूपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच का कहना है कि सामाजिक मूल्यों के पतन के दौर में महापुरूषों की मूर्तियां लगाने से आगामी पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। कुछ लोग राजनीतिक कारणों से बेवजह मूर्तियां लगाने का विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में ग्राम सभा में प्रस्ताव पास करके गांव में महर्षि परशुराम, महाराणा प्रताप और वीर महाराजा सूरजमल की मूर्तियां लगाने की तैयारी है। गांव में मूर्तियां लगाने का विराेध कर रहे गुट के महेंद्र शर्मा ने कहा कि गांव में कुछ लोग जातीय संघर्ष की भावना पैदा कर रहे हैं। गांव के लोग अजेय योद्धा महाराजा सूरजमल का सम्मान करते हैं। जोधियासी गांव विकास की ओर अग्रसर है, गांव में सार्वजनिक जगह बहुत कम है। सार्वजनिक जगहों पर मूर्तियां लगाने से जगह नहीं बचेगी, इस तरह हर समाज के लोग जगह मांगने लगेंगे। गांव में हर तरह की सुविधा है, इसलिए गांव को पंचायत समिति बनाने की तैयारी है। ऐसे में सार्वजनिक जगह की जरूरत भी पड़ेगी। एसडीएम दूसरे पक्ष को सुनकर हमारे साथ अन्याय कर रहे हैं। ग्रामीणाें की मांग है कि सरकारी जमीन का उपयोग सिर्फ सरकार के हित में होना चाहिए। मामले को लेकर जोधियासी सरपंच पति भिंयाराम मूंड ने कहा कि ग्राम सभा और पाक्षिक बैठक में आमजन की मांग पर महर्षि परशुराम, महाराणा प्रताप और वीर महाराज सूरजमल की मूर्तियां लगाने को लेकर प्रस्ताव पास किया गया था। 14 नवंबर को प्रस्ताव पास करवाने के लिए जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी। विरोध कर रहे लोग राजनीतिक स्वार्थ के चलते ऐसा कर रहे हैं। विरोधी लोग जिस जगह की बात कर रहे हैं, वहां पर उन्हीं का कब्जा है। ग्राम पंचायत के पास सार्वजनिक उपयोग के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। नागौर एसडीएम गोविंद सिंह भींचर ने कहा ग्राम पंचायत ने इस संबंध में एनओसी जारी की है। ग्राम पंचायत के हक की जमीन पर निर्माण का अधिकार ग्राम पंचायत को है। ग्राम सभा में प्रस्ताव पास होने के बाद सरपंच संबंधित निर्माण के लिए स्वतंत्र है।


