बीएलओ शिक्षकों को ओबीसी सर्वे में नहीं लगाने की मांग:बच्चों के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका, कलेक्टर को दिया ज्ञापन

झालावाड़ में बीएलओ शिक्षकों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सर्वे कार्य में नहीं लगाने की मांग की गई है। बीएलओ संगठन ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों का पालन करने पर भी जोर दिया है। दरअसल, झालावाड़ जिले के उपखंड अधिकारियों ने बीएलओ शिक्षकों को ओबीसी सर्वे के लिए आदेश जारी किए हैं। बीएलओ संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहा है। संगठन का कहना है कि वर्तमान में शिक्षा विभाग में ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ के तहत ‘ओआरएफ 2.0’ कार्यक्रम चल रहा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में मौखिक पठन कौशल विकसित करना है। जिले के कई विद्यालयों में एकल शिक्षक हैं, जिन्हें बीएलओ बनाया गया है। कुछ विद्यालयों में दोनों शिक्षकों को बीएलओ नियुक्त किया गया है। ऐसे में शिक्षकों को ओबीसी सर्वे में लगाने से ओआरएफ कार्यक्रम प्रभावित होगा। बीएलओ संगठन के जिलाध्यक्ष भारत भूषण मीणा ने कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ रोका जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ओबीसी सर्वे चुनावी कार्य नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों में ही पटवारी, ग्रामसेवक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और नगरीय निकायों के कर्मचारियों को इस कार्य में लगाने के स्पष्ट निर्देश हैं। मीणा ने सवाल उठाया कि जब अन्य विभागों के कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो केवल शिक्षकों को ही क्यों लक्षित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियां भी जारी हैं, जिससे शिक्षकों पर पहले से ही कार्यभार है। शिक्षा का अधिकार कानून भी शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की अनुमति नहीं देता। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो सभी शिक्षक न्यायालय का रुख करेंगे।

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