रतलाम के त्रिवेणी तट पर चल रहे 11 दिनी महारुद्र यज्ञ में सोमवार को गंगाजल कलश यात्रा निकाली गई। यज्ञ शाला में बने हवन कुंड में 21 भू-देवों के सानिध्य मंत्रोचार के साथ आहुतियां दी जा रही है। त्रिवेणी तट पर लगे मेले में पौष अमावस्या पर बढ़ी संख्या में लोग पहुंचे। यज्ञाचार्य पंडित दुर्गाशंकर ओझा के साथ 21 भू-देवों ने मुख्य यजमान प्रेमलता संजय दवे से पूजा-अर्चना करवाई। त्रिवेणी तट से जल कलश में भरा गया। ढोल-ढमाकों व जय सनातन के उद्घोष के साथ महिलाएं गंगाजल कलश सिर पर उठाकर चल रही थी। त्रिवेणी तट परिसर में ही कलश यात्रा का समापन हुआ। बता दें कि सनातन धर्म सभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति द्वारा त्रिवेणी तट पर महारुद्र यज्ञ 70 साल से किया जा रहा है। इस बार 71वां वर्ष हैं। महारुद्र यज्ञ में बढ़ी संख्या में श्रद्धालू पहुंच रहे हैं। यज्ञ में 70 जोड़े बैठे हुए है। कल (मंगलवार) पूर्णा हुति होगी। त्रिवेणी का मेला प्रमुख रहता
जिले वासियों के लिए त्रिवेणी का मेला प्रमुख रहता है। पौष माह की अमावस्या पर शहर के अलावा ग्रामीण अंचलों से भी बढ़ी संख्या में लोग यहां पहुंच कर आनंद लेते हैं। मेले में बड़े झूले समेत अन्य मनोरंजन के साथ बच्चों से लेकर बड़ों के लिए लगे हुए हैं।


