पचंबा के दुर्गा स्थान में 145 वर्षों से जारीहै परंपरा

भास्कर न्यूज़ | गिरिडीह गिरिडीह की उपनगरी पचंबा स्थित सार्वजनिक दुर्गा स्थान में इस वर्ष 22 सितंबर को कलश स्थापना के साथ शरदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। यह दुर्गा मंदिर गिरिडीह ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर छोटानागपुर क्षेत्र में शक्ति उपासना का एक ऐतिहासिक और प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां शक्ति पूजा की परंपरा वर्ष 1880 में तत्कालीन पचंबा स्टेट के राजा टिकैत सिद्धनाथ सिंह ने निजी रूप से आरंभ की थी। वर्ष 1955 में उनके उत्तराधिकारी रासबिहारी सिंह ने इसे सार्वजनिक रूप देते हुए श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया। इसके बाद से ही यहां हर साल शारदीय और बासंतिक नवरात्र में मां दुर्गा की भव्य पूजा होती आ रही है। यह पूजा अब 145 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा बन चुकी है, जिससे पचंबा व आसपास के 53 गांवों के हजारों श्रद्धालु जुड़े हैं। मुख्य संरक्षक गौरीशंकर साहू, संरक्षक अरुण प्रसाद केशरी, संयोजक मुकेश साहू, अध्यक्ष संजय कंधवे, सचिव दीपक साह, कोषाध्यक्ष संजय सिंह, पूजा प्रभारी राजकिशोर गुप्ता, कृष्णानंद झा, मेला प्रभारी रंजीत कुमार भदानी, सुमित साहू, पवन यादव, भंडारा प्रभारी मनोज केशरी, मोहन साहू, मीडिया प्रभारी गौतम सोनी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा मंडप पूजा के दौरान कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। जिसमें पंचमी को चावली देवी खेतान स्कूल के बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, षष्ठी को भोला डांस ग्रुप, महासप्तमी को प्रीतम डांस ग्रुप द्वारा डांस प्रस्तुति, महाअष्टमी को लोकप्रिय भोजपुरी गायिका निशा दुबे, महानवमी को बाल कलाकार एवं गायक आर्यन भक्ति जागरण प्रस्तुत करेंगे। पूजा समिति इस बार आयोजन को और भी भव्य और यादगार बनाने जा रही है। जहां पिछले वर्ष 10 लाख खर्च किए गए थे, 13 लाख से अधिक बजट निर्धारित किया गया है।

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