जयपुर के बहुचर्चित थ्री डिजिट वीआईपी नंबर घोटाले में गांधीनगर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर आरोपी सुरेश तनेजा और रामजीलाल की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। एडीजे-5 मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों के अपराध को संगीन मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
सुरेश तनेजा पहले से ही न्यायिक अभिरक्षा में है, जबकि रामजीलाल ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। अदालत ने उसे भी मंजूर नहीं किया। पुलिस अब अन्य संदिग्धों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। कैसे हुआ फर्जीवाड़ा, कब खुला मामला परिवहन विभाग में थ्री डिजिट वीआईपी नंबरों की सीरीज को बैकलॉग दिखाकर करोड़ों की हेराफेरी की गई। जांच में सामने आया कि बिना वाहन मालिक की जानकारी, अफसरों और बाबुओं ने दलालों के साथ मिलकर 1989 से पहले के थ्री डिजिट नंबर दूसरों के नाम कर दिए।
जयपुर आरटीओ प्रथम में यह सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। यहां वाहन मालिक के नाम पंजीयन तो किसी और के नाम से जारी कर दिए जाते थे। जांच में करीब 2000 वाहनों की फाइल खंगाली गई, जिनमें 1500 वाहनों की पंजीयन अवधि समाप्त होने के बाद भी रिकॉर्ड में 10 से 15 साल तक बढ़ा दी गई थी। वहीं, 500 वाहनों का कोई रिकॉर्ड ही दफ्तर में नहीं मिला। कई मामलों में इंजन और चैचिस नंबर तक बदल दिए गए। लोगों ने कराई आरसी निरस्त, जांच से खुला राज फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद कई वाहन मालिक आरटीओ दफ्तर पहुंचकर अपनी आरसी निरस्त करवाने लगे। इस मामले की शुरुआत आरटीओ राजेन्द्र सिंह शेखावत की ओर से हुई जांच से हुई थी। गोपनीय जांच में गड़बड़ियों का बड़ा जाल सामने आया। सात साल में हजारों नंबर बेचे गए।
इसी दौरान यह भी सामने आया कि एक पूर्व आईएएस अधिकारी की कार का नंबर भी किसी दूसरे वाहन पर जारी कर दिया गया। अधिकारी ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। अफसरों-बाबुओं की मिलीभगत विभागीय जांच में सामने आया कि घोटाले में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। इनमें से कुछ नाम हैं- अधिकारी – प्रकाश टहलयानि, राजीव त्यागी, इंदु मीणा, जितेन्द्र माथुर, रमेश मीणा, सुनील सैनी, संजीव भारद्वाज, रामकृष्ण चौधरी, पारस राम जाट। कर्मचारी – सुरेश तनेजा, दिनेश कुमार शर्मा, निखिल सोनी, रोहिताश गुर्जर, मुकेश मीणा, प्रदीप भारद्वाज, कपिल भाटिया, बीना मारोडिया, निधि गौतम, जयश्री और मेघा श्रीमाल। यह पूरा मामला अब तक का परिवहन विभाग का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ तेज कर दी है और जल्द ही बाकी नामजद लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।


