पति ने बनाई दो फर्जी कंपनी, पत्नी को बनाया डायरेक्टर::40% मुनाफे का लालच देकर करवाते थे इन्वेस्टमेंट, नए निवेशकों को लाने कर्मचारियों को बांटते थे 15% कमीशन, दोनों ने मिलकर ठगे 12 करोड़

शेयर बाजार में निवेश कर रकम दोगुनी करने का लालच देकर दुर्ग-भिलाई के सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड निकला स्नेहांशु नामदेव और उसकी पत्नी डाली नामदेव। दोनों ने मिलकर निवेशकों से लगभग 10 से 12 करोड़ रुपए की ठगी की। पुलिस ने पति-पत्नी समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ऐसे रचा गया ठगी का जाल
37 साल का स्नेहांशु नामदेव और उसकी पत्नी डाली (35 साल) ने निवेशकों को फंसाने के लिए पहले दो फर्जी कंपनियां बनाई। पहली कंपनी निशा बिजनेस कंसल्टेंट प्रा. लि. (सूर्या मॉल, जुनवानी) और दूसरी कंपनी यूनिक इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशन (सुपेला चौक)। इन दोनों कंपनियों का न तो SEBI और न ही RBI से कोई पंजीयन था। बावजूद इसके इन्हें शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट फर्म के रूप में प्रचारित किया गया। बड़े-बड़े बोर्ड, आकर्षक विजिटिंग कार्ड और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए यह भरोसा दिलाया गया कि कंपनी असली है और यहां पैसा लगाना सुरक्षित रहेगा। 20 से 40% मुनाफे का झांसा
आरोपियों ने लोगों को यह कहकर लुभाया कि अगर वे इनके जरिए शेयर बाजार में पैसा लगाएंगे तो हर महीने 20 से 40% तक मुनाफा मिलेगा। इतना ही नहीं, एक साल के भीतर निवेश की रकम दोगुनी कर देने का दावा भी किया गया। नए निवेशकों को जोड़ने के लिए अलग से कंसल्टेंट रखे गए, जिन्हें 10 से 15% तक कमीशन दिया जाता था। शुरुआती महीनों में कुछ निवेशकों को वादा किया गया मुनाफा भी दिया गया, ताकि उनका विश्वास बने और और लोग पैसे लगाएं। पति-पत्नी बने मास्टरमाइंड
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ पति-पत्नी की साजिश है। स्नेहांशु ने अपनी पत्नी डाली को कंपनी की डायरेक्टर बनाकर इसे वैध कारोबार का चेहरा दिया। असल में दोनों मिलकर निवेशकों को ठग रहे थे। उनके दोस्त और परिचित साथी इस खेल में मोहरे की तरह इस्तेमाल किए गए। नकली दस्तावेज और मिरर इमेज से बनाया भरोसा
लोगों को यह यकीन दिलाने के लिए कि उनका पैसा शेयर बाजार में काम कर रहा है, आरोपियों ने हाईटेक तरीका अपनाया। वे फर्जी आईडी और पासवर्ड बनाकर मिरर इमेज तकनीक से ऐसे दस्तावेज तैयार करते, जो बिल्कुल असली ट्रेडिंग अकाउंट जैसे दिखते थे। इन फर्जी रिपोर्ट्स को व्हाट्सऐप पर भेजा जाता और निवेशकों को दिखाया जाता कि उनका पैसा लगातार बढ़ रहा है। कुछ महीने तक भुगतान जारी रखने के बाद जैसे ही रकम बड़ी हुई, आरोपियों ने भुगतान रोक दिया और गायब हो गए। जी रहे थे आलीशान जिंदगी
ठगी से मिली रकम से आरोपी आलीशान जिंदगी जी रहे थे। पुलिस की छापेमारी में इनके पास से जब्त हुई। जब्त संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इनमें महंगी संपत्तियों भी शामिल हैं। पुलिस अब इनके बैंक खातों और संपत्तियों की जांच कर रही है। साथ ही ठगी की रकम की वसूली के प्रयास भी किए जाएंगे। आरोपियों से जब्त हुए ये कीमती सामान
– हार्ले डेविडसन बाइक
– टाटा कर्व कार और अन्य वाहन
– सोने-चांदी के जेवर
– फ्लैट खरीद के दस्तावेज
– महंगे मोबाइल (विदेशी कंपनी Vertu सहित)
– नगदी रकम
– कंप्यूटर-लैपटॉप
– बैंक पासबुक, चेकबुक और लेन-देन से जुड़े रजिस्टर शिकायत पर खुला मामला
यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्मृति नगर निवासी करण शर्मा ने सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई। करण ने बताया कि स्नेहांशु, उसकी पत्नी डाली, निशा मानिकपुरी और धातरी कोसरे ने उससे और उसके साथियों से लगभग 66 लाख 47 हजार रुपए की ठगी की। पुलिस जांच में अब तक 10 से 12 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा हुआ है। अधिकारियों का अनुमान है कि वास्तविक रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई निवेशक अभी सामने आने से बच रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार
– स्नेहांशु नामदेव (37 वर्ष) – मास्टरमाइंड, निवासी साईविला जंजगिरी
– डाली नामदेव (35 वर्ष) – पत्नी और सह-आरोपी
– निशा मानिकपुरी (26 वर्ष) – निवासी विजय नगर, दुर्ग
– धातरी कोसरे (24 वर्ष)– निवासी डीपाकेट मरोदा, भिलाई
– शुभम गुप्ता (25 वर्ष) – निवासी कृपाल नगर, कोहका फर्जीवाड़ा का शिकार और लोग भी आ सकते हैं सामने
पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में संलिप्त सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया है। मामले की जांच करने वाले जांच अधिकारियों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए और भी लोग सामने आ सकते हैं। अनुमान है कि कुल ठगी की रकम 12 करोड़ से कहीं ज्यादा निकल सकती है।

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