भास्कर न्यूज| अमृतसर रावी नदी में आए बाढ़ ने अजनाला के गांवों में बड़ी तबाही मचाई। जिसके बाद नेताओं-एक्टर्स व समाजसेवी संगठनों ने बाढ़ पीडितों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए गांवों को गोद लेने का ऐलान किया। लेकिन किन गांवों को गोद लिया इसका पता नहीं है। न ही प्रशासन से ऐसी कोई लिस्ट जारी की जा सकी कि किसने किन गांवों को गोद लिया है। उनका तेजी से विकास कार्य भी शुरू करवाया जा चुका। बीते 27 अगस्त को कई जगह से धुस्सी बांध टूटने पर गांव डूबने लगे। करीब 196 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। फसलें डूब कर बर्बाद हो गई। करीब 7 लोगों की डेथ हो गई। हर किसी ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। राशन से लेकर कपड़े व जरूरत के सामान अपनी क्षमता के अनुसार पहुंचाए गए। फिलहाल, गांवों के लोगों का सबकुछ बर्बाद होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारे और खुद उठ खड़े होने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे हैं। धुस्सी बांध को बांधने के लिए नदी के किनारे देखे जा सकते हैं। इस बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि गांवों को गोद लेने का ऐलान करने वाले अब नजर नहीं आ रहे हैं। कौन-कौन से गांव गोद लिए जा चुके और कितने रह गए हैं। यदि इसकी सटीक जानकारी प्रशासन जारी करती तो शायद जो गांव रह जाते उनके लिए भी लोग आगे आते। बता दें कि आम आदमी पार्टी की सरकार होने के बावजूद सिर्फ तलबीर गिल ने 5 गांवों को गोद लेने का ऐलान किया। जबकि एनजीओ अमृतसर सेवा भारती ने 15 गांवों को गोद लेने के साथ ही 50 और गांवों को गोद लेने के तैयारी का भरोसा दिलाया तो जीएनडीयू ने 1 गांव को गोद लेकर मॉडल बनाने की बात कही थी। जिसकी खूब सराहना हुई। अब गांवों के लोग आस लगाए बैठे हैं कि आखिर गोद लिए जाने के बाद ये कायाकल्प कराने का काम कब से शुरू होगा। या फिर सब ऐलान तक ही सीमित था। प्रशासन को चाहिए कि इसकी लिस्ट साझा करे। गांवों के गोद लिए जाने के बारे आप नेता तलबीर गिल व प्रशासनिक अफसरों से इस बारे पूछने पर चुप रहना जरूरी समझा। शहरी इलाके के विधायकों में कुछ का रोल राशन बांटने में नजर आया। लेकिन कोई बड़ी नकद राशि व गांवों को गोद लेकर कायाकल्प कराने जैसा रोल नहीं रहा।


